मुंबई: 28,000 करोड़ रुपये की योजना से मुंबई की बदहाल बेस्ट बस सेवा की ‘कायापलट’ की तैयारी
Mumbai: A Rs 28,000 crore plan is underway to transform Mumbai's ailing BEST bus service.
घाटे में चल रहे बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और वित्तीय संकट से बाहर निकलने के लिए 28,000 करोड़ रुपये की पुनर्जीवन योजना को मंजूरी दे दी है. बेस्ट समिति की इस योजना का नाम ‘कायापलट’ है. इसका उद्देश्य पुराने बस डिपो को आधुनिक बनाना और उन्हें कमर्शियल और रिहायशी हब में बदलकर उनसे कमाई करना है. आर्थिक तंगी से जूझ रही बेस्ट मुंबई की प्रमुख जमीनों पर बने 27 में से 22 बस डिपो को आधुनिक बनाकर उन्हें मिश्रित उपयोग वाले शहरी केंद्रों में बदलना चाहती है.
मुंबई: घाटे में चल रहे बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और वित्तीय संकट से बाहर निकलने के लिए 28,000 करोड़ रुपये की पुनर्जीवन योजना को मंजूरी दे दी है. बेस्ट समिति की इस योजना का नाम ‘कायापलट’ है. इसका उद्देश्य पुराने बस डिपो को आधुनिक बनाना और उन्हें कमर्शियल और रिहायशी हब में बदलकर उनसे कमाई करना है. आर्थिक तंगी से जूझ रही बेस्ट मुंबई की प्रमुख जमीनों पर बने 27 में से 22 बस डिपो को आधुनिक बनाकर उन्हें मिश्रित उपयोग वाले शहरी केंद्रों में बदलना चाहती है.
बेस्ट ने इस योजना को मंजूरी दे दी है. अब इसे मंजूरी के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम के पास भेजा जाएगा. इसके बाद अंतिम मंजूरी के लिए इसे महाराष्ट्र सरकार के पास भेजा जाएगा. कायापलट योजना के तहत 132 एकड़ में फैले 22 डिपो को आधुनिक एकीकृत हब में बदला जाएगा, जिससे घाटे में चल रही संस्था को आमदनी होगी. बेस्ट के पास कुल 190 एकड़ में फैले 27 डिपो हैं.
बेस्ट पर 14,323 करोड़ रुपये की देनदारी है. 5,000 बसें चलाने के लिए उसे 13,561 करोड़ रुपये की जरूरत है. योजना के तहत 28,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. इससे देनदारियां चुकाई जाएंगी, नई बसें खरीदी जाएंगी और कर्मचारियों से जुड़े खर्च भी पूरे किए जाएंगे. इससे पहले बेस्ट कुर्ला डिपो का पुनर्विकास कर चुकी है. वहीं धारावी और काला किला डिपो को धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए सौंपा गया है. अनिक और प्रतीक्षा नगर डिपो मेट्रो-11 कॉरिडोर के निर्माण के लिए दिए जा रहे हैं.
बेस्ट के एक अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “इस पहल के तहत तैयार होने वाला सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर संस्था के लिए लंबे समय तक नियमित और स्थायी आय का स्रोत बनेगा. इस परियोजना के तहत एक समर्पित कॉर्पस फंड और एक रिकरिंग फंड बनाया जाएगा, जिससे संस्था की लंबी अवधि की वित्तीय जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी.”
उन्होंने कहा, “इस बदलाव की योजना से मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली बेस्ट को फिर से मजबूत बनाया जाएगा, ताकि यह आर्थिक रूप से सक्षम बन सके और यात्रियों को आधुनिक और बेहतर सेवाएं दे सके.”
अधिकारी ने आगे कहा कि इस योजना से बेस्ट की आर्थिक मदद के लिए बीएमसी पर निर्भरता कम होगी, क्योंकि संस्था की अपनी कमाई का स्रोत तैयार होगा. मौजूदा वित्तीय वर्ष में बीएमसी ने बेस्ट को 1,000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी है. पहले चरण में बस डिपो और कर्मचारियों के क्वार्टरों को आधुनिक बनाया जाएगा. इसके बाद सार्वजनिक पार्किंग और सामाजिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा. यह पुनर्विकास डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर मॉडल के तहत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल से किया जाएगा. जमीन का मालिकाना हक बेस्ट के पास ही रहेगा.
बेस्ट समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव के मुताबिक, मुंबई को सुचारू रूप से चलाने के लिए कम से कम 7,000 बेस्ट बसों की जरूरत है. फिलहाल शहर में 2,792 बेस्ट बसें हैं. आबादी के हिसाब से मुंबई में करीब 12,000 बसें होनी चाहिए. अधिकारियों ने बताया कि बेस्ट ने 2026-27 के लिए 1,500 मिडी बसों का ऑर्डर दे दिया है. ये बसें चार चरणों में आएंगी.


