महाराष्ट्र : 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर 0.4% MDR... UPI चार्ज पर राज ठाकरे ने उठाए सवाल,
Maharashtra: 0.4% MDR on payments exceeding ₹2,000 starting October 15... Raj Thackeray raises questions regarding UPI charges.
राज ठाकरे ने कांग्रेस के उस आरोप का भी उल्लेख किया, जिसमें इस फैसले - को अमेरिका के दबाव से जोड़ने का दावा किया गया है। उन्होंने केंद्र सरकार - से पूछा कि शुल्क व्यवस्था लागू करने से पहले उसने किन पक्षों से विचार-विमर्श किया था और निर्णय लेने की प्रक्रिया क्या थी। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यूपीआई के संचालन, रखरखाव और साइबर सुरक्षा के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने का यह तरीका क्यों चुना गया।
महाराष्ट्र : अध्यक्ष राज ठाकरे ने निर्धारित यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए 'डिजिटल ट्रैप' करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यूपीआई को डिजिटल लेनदेन को आसान बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, तो इसके दीर्घकालिक संचालन और साइबर सुरक्षा के लिए पहले से स्थायी वित्तीय व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
ठाकरे ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी बयान में कहा कि सरकार ने यूपीआई के जरिए डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दिया और लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया की अपेक्षा की थी। लोगों ने इसे अपनाया भी। लेकिन अब शुल्क लगाने का फैसला इस व्यवस्था को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
सरकार ने मंगलवार को घोषणा की थी कि 15 अक्टूबर से बड़े व्यापारिक भुगतानों के लिए यूपीआई लेनदेन पर नई शुल्क व्यवस्था लागू होगी। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क मर्चेंट डिस्काउंट (एमडीआर) कहलाता है।
ठाकरे ने कहा कि मनसे एमडीआर का विरोध करती है और व्यापारियों से नए शुल्क का भुगतान नहीं करने की अपील करती है। उन्होंने कहा कि यूपीआई जैसी भुगतान प्रणाली के रखरखाव और साइबर सुरक्षा के लिए निश्चित रूप से धन की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके लिए स्थायी बजटीय प्रावधान किया जाना चाहिए था।
राज ठाकरे ने कांग्रेस के उस आरोप का भी उल्लेख किया, जिसमें इस फैसले - को अमेरिका के दबाव से जोड़ने का दावा किया गया है। उन्होंने केंद्र सरकार - से पूछा कि शुल्क व्यवस्था लागू करने से पहले उसने किन पक्षों से विचार-विमर्श किया था और निर्णय लेने की प्रक्रिया क्या थी। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यूपीआई के संचालन, रखरखाव और साइबर सुरक्षा के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने का यह तरीका क्यों चुना गया।


