मुंबई: शिवाजी पार्क में उद्धव को दशहरा रैली के लिए बीएमसी से मिली मंजूरी, शिंदे की पार्टी ने नहीं दी अर्जी

Mumbai: Uddhav gets BMC approval for Dussehra rally at Shivaji Park; Shinde's party refuses to apply

मुंबई: शिवाजी पार्क में उद्धव को दशहरा रैली के लिए बीएमसी से मिली मंजूरी, शिंदे की पार्टी ने नहीं दी अर्जी

मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में इस बार भी शिवसेना (यूबीटी) की ही दशहरा रैली होगी। बीएमसी ने 20 अक्टूबर को होने वाले इस कार्यक्रम के लिए उद्धव ठाकरे गुट को हरी झंडी दे दी है। अधिकारियों के मुताबिक, 20 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में रैली करने के लिए किसी भी दूसरी पार्टी ने अर्जी नहीं दी थी, इसलिए बीएमसी ने आसानी से इसकी इजाजत दे दी। उद्धव गुट ने इस बार कोई रिस्क न लेते हुए दो महीने पहले ही बीएमसी में परमिशन के लिए एप्लीकेशन दे दी थी।

मुंबई: मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में इस बार भी शिवसेना (यूबीटी) की ही दशहरा रैली होगी। बीएमसी ने 20 अक्टूबर को होने वाले इस कार्यक्रम के लिए उद्धव ठाकरे गुट को हरी झंडी दे दी है। अधिकारियों के मुताबिक, 20 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में रैली करने के लिए किसी भी दूसरी पार्टी ने अर्जी नहीं दी थी, इसलिए बीएमसी ने आसानी से इसकी इजाजत दे दी। उद्धव गुट ने इस बार कोई रिस्क न लेते हुए दो महीने पहले ही बीएमसी में परमिशन के लिए एप्लीकेशन दे दी थी।

 

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दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने इस साल शिवाजी पार्क के लिए कोई आवेदन ही नहीं किया था। इससे शिवाजी पार्क में रैली को लेकर दोनों गुटों के बीच होने वाला सीधा टकराव टल गया है। शिंदे गुट इस बार अपनी दशहरा रैली दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में करने की तैयारी कर रहा है। अगर उस दौरान बारिश होती है, तो कार्यक्रम को गोरेगांव के नेस्को में शिफ्ट किया जा सकता है। इससे पहले शिवाजी पार्क को लेकर दोनों गुटों में काफी खींचतान देखी गई थी, लेकिन बाद में शिंदे गुट ने अपने कदम पीछे खींच लिए थे और 2023 के बाद से वहां के लिए कोई अर्जी नहीं लगाई है।

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बताया जा रहा है कि दोनों ही रैलियां एक ही समय पर शुरू और खत्म होंगी। सुप्रीम कोर्ट में असली शिवसेना के नाम और चुनाव निशान को लेकर चल रही लड़ाई के बीच, दोनों नेता मंच से एक-दूसरे पर तीखे हमले करेंगे। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे, दोनों ही अपनी-अपनी रैलियों में मुख्य वक्ता होंगे और खुद को असली शिवसेना बताएंगे। इन रैलियों में बीजेपी, कांग्रेस या एनसीपी जैसी सहयोगी पार्टियों के किसी भी बड़े नेता के शामिल होने या भाषण देने की संभावना नहीं है।

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