बेंगलुरु: शराब बिक्री रोकने के फैसले पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
Bengaluru: High Court expresses displeasure over decision to stop liquor sale
गणेश उत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर लंबे समय तक रोक लगाने के आदेश को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर पूरे गणेश उत्सव के दौरान कई दिनों तक शराब की दुकानों को बंद रखने का औचित्य क्या है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में यहां तक टिप्पणी कर दी कि अगर किसी को 10 दिनों तक शराब नहीं मिलेगी तो वह 'बीमार हो जाएगा'। अदालत की इस टिप्पणी के बाद मामला चर्चा में आ गया है।
बेंगलुरु: गणेश उत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर लंबे समय तक रोक लगाने के आदेश को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर पूरे गणेश उत्सव के दौरान कई दिनों तक शराब की दुकानों को बंद रखने का औचित्य क्या है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में यहां तक टिप्पणी कर दी कि अगर किसी को 10 दिनों तक शराब नहीं मिलेगी तो वह 'बीमार हो जाएगा'। अदालत की इस टिप्पणी के बाद मामला चर्चा में आ गया है।
विवाद स्थानीय प्रशासन की ओर से गणेश उत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध से जुड़ा है। आदेश के तहत त्योहार और गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से शराब की दुकानों को कई दिनों तक बंद रखने की बात कही गई थी। इस आदेश को शराब कारोबारियों ने कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि पूरे उत्सव के दौरान लगातार शराब की बिक्री बंद रखना जरूरत से ज्यादा कठोर फैसला है और इससे लाइसेंस प्राप्त कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान होगा।
हाईकोर्ट ने पूछा- इतने दिनों की रोक क्यों? मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन से यह जानना चाहा कि शराब की बिक्री पर इतने लंबे समय के लिए रोक लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। आमतौर पर चुनाव, महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन, जुलूस या कानून-व्यवस्था की संवेदनशील परिस्थितियों में प्रशासन 'ड्राई डे' घोषित कर सकता है। लेकिन अदालत के सामने सवाल यह था कि क्या पूरे त्योहार के दौरान लगातार कई दिनों तक शराब की बिक्री बंद रखना आवश्यक और आनुपातिक कदम है।
अदालत ने प्रशासन से प्रतिबंध का स्पष्ट आधार बताने को कहा। कोर्ट ने संकेत दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके नाम पर किसी वैध कारोबार पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। 10 दिन में तो बीमार हो जाएंगे' सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा जज की उस टिप्पणी की हो रही है जिसमें लंबे समय तक शराब नहीं मिलने को लेकर मजाकिया अंदाज में बात कही गई। कोर्ट ने सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से शराब पीता है और उसे 10 दिनों तक शराब नहीं मिले तो वह बीमार पड़ सकता है। इस टिप्पणी को शराब सेवन को प्रोत्साहित करने के रूप में नहीं बल्कि प्रशासन की ओर से लगाए गए लंबे प्रतिबंध की व्यावहारिकता पर सवाल के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
अदालतों में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश कई बार मौखिक टिप्पणियां करते हैं। ऐसी मौखिक टिप्पणियों और अदालत के लिखित आदेश के बीच अंतर होता है। मामले में कानूनी रूप से वही प्रभावी होगा जो हाईकोर्ट के औपचारिक आदेश में दर्ज किया गया है। शराब कारोबारियों ने दी थी चुनौती शराब विक्रेताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि उनके पास वैध लाइसेंस हैं और वे सरकार को विभिन्न शुल्क और टैक्स का भुगतान करते हैं। इसके बावजूद यदि उन्हें लंबे समय तक दुकानें बंद रखने का आदेश दिया जाता है तो आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कारोबारियों का कहना था कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए किसी विशेष दिन या कुछ घंटों के लिए शराब की बिक्री रोकी जा सकती है, लेकिन पूरे उत्सव की अवधि के लिए प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन के आदेश को अनुपातहीन बताते हुए अदालत से राहत मांगी। प्रशासन ने क्यों लगाया प्रतिबंध? गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक कार्यक्रम और जुलूस आयोजित किए जाते हैं।
गणेश प्रतिमाओं की स्थापना से लेकर विसर्जन तक विभिन्न इलाकों में भारी भीड़ रहती है। प्रशासन अक्सर ऐसे अवसरों पर शराब की बिक्री को कानून-व्यवस्था से जोड़कर देखता है। आशंका रहती है कि नशे की स्थिति में विवाद, मारपीट या जुलूस के दौरान अप्रिय घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है। इसी वजह से संवेदनशील क्षेत्रों में शराब की दुकानों को बंद रखने के आदेश दिए जाते हैं। कई राज्यों में धार्मिक जुलूस, मतदान या बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सीमित अवधि के लिए शराब की बिक्री प्रतिबंधित करना सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था है। लेकिन मौजूदा मामले में विवाद प्रतिबंध की लंबी अवधि को लेकर पैदा हुआ। कानून-व्यवस्था बनाम कारोबार का अधिकार हाईकोर्ट के सामने इस मामले में दो पहलुओं के बीच संतुलन का सवाल है। एक तरफ राज्य और स्थानीय प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी है। दूसरी ओर लाइसेंस लेकर कारोबार करने वाले दुकानदारों के हित भी हैं।


