नालासोपारा : 68 सखी केंद्रों ने बदली महिलाओं की जिंदगी
Nalasopara: 68 Sakhi centres have transformed the lives of women
घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न या किसी भी तरह के संकट का सामना कर रही महिलाओं के लिए महाराष्ट्र सरकार की ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ पहल महत्वपूर्ण सहारा बन रही है। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को एक ही जगह पर सुरक्षा, काउंसलिंग, चिकित्सा सहायता और कानूनी मदद जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
नालासोपारा : घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न या किसी भी तरह के संकट का सामना कर रही महिलाओं के लिए महाराष्ट्र सरकार की ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ पहल महत्वपूर्ण सहारा बन रही है। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को एक ही जगह पर सुरक्षा, काउंसलिंग, चिकित्सा सहायता और कानूनी मदद जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य सरकार ने पूरे महाराष्ट्र में 68 सखी वन स्टॉप सेंटर स्थापित किए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 से जुलाई 2026 के बीच इन केंद्रों के माध्यम से 26,909 महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराई गई है।
संकट में महिलाओं को मिल रही तत्काल मदद
सखी वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य ऐसी महिलाओं को सहायता देना है, जो घरेलू हिंसा, यौन हिंसा, उत्पीड़न या अचानक आए किसी गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। इन केंद्रों में पीड़ित महिलाओं को अलग-अलग जगहों पर भटकने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्हें एक ही स्थान पर कई तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग राज्य सरकार के सहयोग से इन केंद्रों का संचालन कर रहा है।
24 घंटे उपलब्ध रहती हैं सेवाएं
सखी वन स्टॉप सेंटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां महिलाओं को 24 घंटे सहायता उपलब्ध कराई जाती है। किसी भी आपात स्थिति में महिलाएं यहां पहुंचकर पुलिस सहायता, चिकित्सा सुविधा और काउंसलिंग प्राप्त कर सकती हैं। इसके अलावा महिलाओं को कानूनी सलाह और अन्य जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। सुरक्षित रहने की भी व्यवस्था कई बार हिंसा या उत्पीड़न का सामना करने वाली महिलाओं के सामने रहने की समस्या भी खड़ी हो जाती है।
ऐसी परिस्थितियों में सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं और उनके बच्चों के लिए अस्थायी सुरक्षित रहने की व्यवस्था भी उपलब्ध करा सकते हैं। इससे पीड़ित महिलाओं को मुश्किल समय में सुरक्षित माहौल मिल पाता है। काउंसलिंग से मानसिक सहारा हिंसा या उत्पीड़न से गुजरने वाली महिलाओं पर मानसिक दबाव भी काफी बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में केंद्रों पर विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग की सुविधा दी जाती है, जिससे महिलाएं अपने हालात से उबरने और आगे की रणनीति तय करने में सक्षम हो सकें।


