नई दिल्ली : अभिजीत दिपके की कॉकरोच पार्टी में पड़ गई फूट, अब बन गई सीजेपी-डी, इसके फाउंडर मनीष ब्रह्मभट्ट कौन?
New Delhi: Abhijeet Dipke's Cockroach Party splits, now becomes CJP-D, who is its founder Manish Brahmabhatt?
कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दिपके को बड़ा झटका लगा है. दो महीने पहले ही लाइमलाइट में आई कॉकरोच जनता पार्टी में फूट पड़ गई है. सीजेपी का हिस्सा रहे और जंतर-मंतर आंदोलन में भूमिका निभाने वाले मनीष ब्रह्मभट्ट ने अपनी अलग कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक बना ली है. इससे सीजेपी में मौजूद जेन-जी का एक बड़ा धड़ा अब सीजेपी-डी की तरफ होने की संभावना बन रही है.
नई दिल्ली : कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दिपके को बड़ा झटका लगा है. दो महीने पहले ही लाइमलाइट में आई कॉकरोच जनता पार्टी में फूट पड़ गई है. सीजेपी का हिस्सा रहे और जंतर-मंतर आंदोलन में भूमिका निभाने वाले मनीष ब्रह्मभट्ट ने अपनी अलग कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक बना ली है. इससे सीजेपी में मौजूद जेन-जी का एक बड़ा धड़ा अब सीजेपी-डी की तरफ होने की संभावना बन रही है.
कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?
मनीष ब्रह्मभट्ट ने 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में पालनपुर सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें सिर्फ 964 वोट मिले (कुल वोटों का 0.53%). इस दौरान वे पांचवें नंबर पर रहे. उस सीट पर भाजपा के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर जीते थे, जिन्हें 95,588 वोट मिले थे. इन पर 4 आपराधिक मामले भी दर्ज हैं.
मनीष ब्रह्मभट्ट की उम्र करीब 41 साल है. ये एक मैनेजमेंट कंसल्टेंट हैं और इन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से बी कॉम और एफवाई एलएलबी की पढ़ाई की है. 2022 में चुनावी हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक इनके पास कुल 44.42 लाख रुपये की संपत्ति है और कोई कर्ज नहीं है.
हालांकि इनके खिलाफ 4 आपराधिक मामले दर्ज बताए गए थे, जिनमें गंभीर चोट पहुंचाने और गलत बयानबाजी जैसे आरोप शामिल हैं. उनके चुनावी हलफनामे में चार लंबित आपराधिक मामले बताए गए हैं. इनमें आईपीसी की धारा 325 (गंभीर चोट पहुंचाना), 505(2) (समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने वाले बयान), 114 (अपराध के समय मदद करने वाला मौजूद होना), 323 (साधारण चोट पहुंचाना), 153 (दंगा भड़काने की कोशिश), 501 (मानहानिकारक चीज छापना) और 502 (मानहानिकारक चीज बेचना) के आरोप शामिल हैं.
सीजेपी आंदोलन में शामिल होने का दावा
मनीष ब्रह्मभट्ट का कहना है कि वे जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के छात्र आंदोलन का हिस्सा थे. उन्होंने खुद को स्वयंसेवक और कोऑर्डिनेटर बताया है. अगस्त में वे गुजरात से छत्रपति संभाजीनगर गए, जहां सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके कोर टीम की मीटिंग कर रहे थे. ब्रह्मभट्ट और उनके साथी राहुल पांड्या ने दिपके के घर के बाहर प्रदर्शन किया. उनका आरोप था कि आंदोलन को खड़ा करने वाले आम कार्यकर्ताओं को भविष्य के फैसलों से बाहर रखा जा रहा है.
मनीष ने आरोप लगाया कि जंतर मंतर आंदोलन से करीब 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे, लेकिन नई लीडरशिप में न तो उन्हें पूछा जा रहा है और न ही उनका कोई प्रतिनिधित्व है. सीजेपी छात्र आंदोलन में शुरू में “बिना चेहरे के शुरू हुआ था. इसके लिए सैकड़ों स्वयंसेवकों ने जमीनी स्तर पर काम किया था, लेकिन अब जब यह सफल हो गया तो इस संगठन का भविष्य कुछ चुने हुए लोगों के हाथ में जा रहा है, जो नहीं होना चाहिए.


