छत्रपति संभाजीनगर : रासायनिक कचरे के अवैध डंपिंग का बड़ा खुलासा, मुख्य सरगना यूपी से गिरफ्तार

Chhatrapati Sambhajinagar: Major revelation of illegal dumping of chemical waste, main mastermind arrested from UP

छत्रपति संभाजीनगर : रासायनिक कचरे के अवैध डंपिंग का बड़ा खुलासा, मुख्य सरगना यूपी से गिरफ्तार

ग्रामीण जिले में खतरनाक औद्योगिक रसायनों और रासायनिक पाउडर के अवैध परिवहन एवं निपटान के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश से मुख्य सरगना इस्तेकार अहमद निसार खान को गिरफ्तार कर लिया है। सिल्लोड ग्रामीण पुलिस की विशेष टीम ने लगातार निगरानी, तकनीकी जांच और गोपनीय सूचना के आधार पर नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के इलाके में कार्रवाई कर उसे पकड़ा। मामला दर्ज होने के बाद से इस्तेकार खान फरार चल रहा था और पुलिस की भनक लगते ही लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था।

छत्रपति संभाजीनगर : ग्रामीण जिले में खतरनाक औद्योगिक रसायनों और रासायनिक पाउडर के अवैध परिवहन एवं निपटान के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश से मुख्य सरगना इस्तेकार अहमद निसार खान को गिरफ्तार कर लिया है। सिल्लोड ग्रामीण पुलिस की विशेष टीम ने लगातार निगरानी, तकनीकी जांच और गोपनीय सूचना के आधार पर नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के इलाके में कार्रवाई कर उसे पकड़ा। मामला दर्ज होने के बाद से इस्तेकार खान फरार चल रहा था और पुलिस की भनक लगते ही लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था।

 

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पुलिस के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर ग्रामीण जिले के पालशी, सिल्लोड शहर, फरदापुर, आलंद, शिवुर और तोंडापुर समेत कई स्थानों पर खतरनाक रसायनों से भरे ड्रमों की अवैध डंपिंग की घटनाओं की जांच के दौरान इस गिरोह का नेटवर्क सामने आया। जांच में घटनास्थल से मिले रासायनिक ड्रम, दूषित मिट्टी, पर्यावरणीय नुकसान, वाहनों की आवाजाही, आरोपियों के संपर्क और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ा गया। जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क के तार महाराष्ट्र के अलावा तेलंगाना, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक जुड़े होने का खुलासा हुआ। अब तक की कार्रवाई में पुलिस ने 1,601 ड्रमों में भरे करीब 3 लाख 52 हजार 220 लीटर खतरनाक औद्योगिक रसायन, 40 टन रासायनिक पाउडर और 50 टन रासायनिक रूप से दूषित मिट्टी बरामद की है। इसके अलावा तीन ट्रक, एक हाइड्रा मशीन और करीब 80.35 लाख रुपए मूल्य के सात मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। इस मामले में इस्तेकार खान समेत कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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पुलिस जांच में सामने आया है कि इस्तेकार खान का औद्योगिक कचरा निपटान के कारोबार से पुराना संबंध रहा है। वर्ष 2005 में मुंबई के धारावी स्थित गोल्डन कैसल कंपनी में काम करने के दौरान उसने प्लास्टिक कचरा एकत्र करने और उससे पेलेट बनाने का अनुभव हासिल किया। बाद में उसने अपने भाई के साथ प्लास्टिक निपटान की फर्म शुरू की और भोइसर तथा एमआईडीसी क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा एकत्र कर उसका निपटान करने का काम किया। इसी कारोबार के दौरान उसके संपर्क हैदराबाद के सादिक और हुसैन से हुए। सादिक के माध्यम से वह तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के मुनिपल्ली स्थित वीबीआर ग्रीन एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा, जबकि हुसैन के जरिए राजस्थान के निम्बाहेड़ा स्थित 3आर एनवायरो कंपनी से संपर्क हुआ।

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आरोप है कि इसके बाद गिरोह ने औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाले खतरनाक रसायनों और पाउडर का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने के बजाय उन्हें अवैध रूप से विभिन्न स्थानों पर डंप करने का सिलसिला शुरू किया। पुलिस के मुताबिक, अगस्त 2025 के आसपास इस्तेकार खान सादिक के माध्यम से सिल्लोड निवासी अब्दुल गफ्फार खान हामिद खान पठान के संपर्क में आया। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर ग्रामीण क्षेत्र में रासायनिक कचरे के अवैध निपटान की गतिविधियों में उसकी भूमिका और अधिक सक्रिय हो गई।प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला है कि पिछले 10 से 12 महीनों के दौरान इस्तेकार खान ने 100 से अधिक मालवाहक वाहनों के जरिए बड़ी मात्रा में रासायनिक कचरा छत्रपति संभाजीनगर ग्रामीण क्षेत्र में भेजा। प्रत्येक वाहन में करीब 200 लीटर क्षमता वाले 100 ड्रम भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

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पुलिस का अनुमान है कि पिछले 10 से 11 महीनों में 10 हजार से अधिक रासायनिक ड्रमों के साथ सोडियम बाइकार्बोनेट से मिश्रित दूषित मिट्टी भी निपटान के लिए भेजी गई। इस अवैध निपटान के लिए गफ्फार पठान को प्रत्येक वाहन के हिसाब से अतिरिक्त भुगतान किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस के अनुसार, रासायनिक कचरे के अवैध निपटान के लिए गिरोह से जुड़े लोगों के बीच 80 लाख रुपए से अधिक का वित्तीय लेन-देन हुआ है। जांच के दौरान राजस्थान के निम्बाहेड़ा स्थित 3आर एनवायरो कंपनी से जुड़े अत्यधिक खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल का भी खुलासा हुआ है।

मौके से जब्त ड्रमों पर लगे लेबल के आधार पर इनमें टीएचएफ, क्लोरोफॉर्म और टोल्यून जैसे उच्च जोखिम वाले औद्योगिक सॉल्वेंट होने की प्रारंभिक जानकारी मिली है। रसायनों की वास्तविक संरचना की पुष्टि सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच के बाद ही होगी। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मार्गदर्शन में जब्त रसायनों को सुरक्षित निपटान के लिए पुणे स्थित मान्यता प्राप्त टीएसडीएफ भेजा गया है।मुख्य आरोपी इस्तेकार खान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उसके पीछे जुड़े लोगों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है। फिलहाल, वह पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस रासायनिक कचरे के मूल स्रोत, ट्रांसपोर्टरों, बिचौलियों, वित्तीय लेन-देन और कचरे के अंतिम निपटान के स्थान एवं तरीके की जांच कर रही है। राजस्थान और हैदराबाद में भी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।