मुंबई: यूपी में नहीं दे पाए नौकरी इसलिए मुंबई आए...मराठी भाषा के मुद्दे पर मंत्री प्रताप सरनाईक का अखिलेश यादव पर पलटवार
Mumbai: Could not provide jobs in UP, hence came to Mumbai... Minister Pratap Sarnaik hits back at Akhilesh Yadav on Marathi language issue
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने पर राजनीति गरमाई हुई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एक्स पोस्ट पर अब महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि मैं अखिलेश यादव से बस इतना कहना चाहूंगा कि उन्हें महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स के बारे में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के बारे में सोचना चाहिए। महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जो हमेशा कल्चर और सम्मान का ध्यान रखता है।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने पर राजनीति गरमाई हुई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एक्स पोस्ट पर अब महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि मैं अखिलेश यादव से बस इतना कहना चाहूंगा कि उन्हें महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स के बारे में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के बारे में सोचना चाहिए। महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जो हमेशा कल्चर और सम्मान का ध्यान रखता है। पिछले कई सालों से नॉर्थ इंडियन लोगों को नौकरी के मौके नहीं मिले, जिसकी वजह से महाराष्ट्र पिछले 40-50 सालों से नॉर्थ इंडियंस को रोजी-रोटी दे रहा है। महायुति सरकार ऐसी सरकार है जो नौकरी देती है, छीनती नहीं। महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के निर्देश और ऑटो ड्राइवरों के विरोध पर अखिलेश यादव ने एक्स पोस्ट करके मामले को उठाया था। प्रताप सरनाईक ने अखिलेश यादव को निशाने पर लिया है।
अखिलेश यादव ने उठाया था मुद्दा
अखिलेश यादव ने लिखा था कि हर राज्य की मातृभाषा का सम्मान और उत्थान होना चाहिए लेकिन किसी भी भाषा का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। इससे देश की भाषिक-भाविक एकता में दूरी और दुराव पैदा होता है। मुंबई में भाजपा के उत्तर भारतीय नेता हैं या भ्रष्टाचार में लीन होकर ठंडे पड़े हैं। क्या इस तरह की भाषा-ज्ञान की शर्त रखकर किसीको संपूर्ण देश में व्यवसाय करने की स्वतंत्रता के सांविधानिक अधिकार का हनन नहीं होता है? अगर ऐसा ही है तो फिर जो विदेशी कंपनियां मुंबई में काम कर रही हैं, उन पर भी ये शर्त लागू हो लेकिन होगी नहीं क्योंकि धन लोलुप भाजपा धनवानों के आगे कालीन की तरह बिछने को तैयार रहती है। भाजपा का सारा ज़ोर गरीबों, शोषितों, वंचितों और उपेक्षितों पर ही चलता है।
अखिलेश ने बीजेपी पर बोला था हमला
अखिलेश यादव ने लिखा था कि अगर ऐसा ही है तो मुंबई-महाराष्ट्र की भाजपा घोषित कर दे कि वो किसी हिंदी, ब्रज, बुंदेली, रोहेली-कौरवी, अवधी, भोजपुरी, मैथिली; हरियाणवी, गढ़वाली- कुमायूँनी; मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाती, मालवी, हाड़ौती, बागड़ी, शेखावाटी, मेवाड़ी; गुजराती, काठियावाड़ी, सुरती, चरोतरी, महसाणी; तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयाली, तुलु, ओड़िया, गंजामी, संबलपुरी-कोसली, बालेश्वरी देसिया; सिंधी, पंजाबी; कश्मीरी-कॉशुर, डोगरी, गोजरी, पहाड़ी, शिना, बाल्टी, लद्दाखी; असमिया, मणिपुरी-मेइतेइलोन, मिजो, कोकबोरोक, खासी, गारो, नागामी, बोडो, भीली, गोंडी, कुड़ुख, मुंडारी, संथाली व अन्य भाषा भाषियों का एक भी वोट नहीं लेगी। आखिर में उन्होंने लिखा था कि सरकारों को दिल भी बड़ा रखना चाहिए और दिमाग भी।
आप उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम हैं। आप अपने समय में नौकरी नहीं दे पाए, इसलिए ये लोग महाराष्ट्र आए और हमने उन्हें स्वीकार कर लिया। इसे यूपी में चुनावी एजेंडा न बनाएं। राज्य में, हमने 1600-1800 टीचर (मराठी पढ़ाने के लिए) रखे हैं। हम बस इतना कह रहे हैं कि पैसेंजर से मराठी में बात करें, मराठी प्राइड बनाए रखें। आपको 1 महीने का समय दिया जाएगा और उसके बाद 3 महीने का समय दिया जाएगा। अगर आप अभी भी मराठी नहीं सीख पा रहे हैं, तो आपका बैज कैंसिल कर दिया जाएगा। क्योंकि यह महाराष्ट्र है। राज्य रोज़ी-रोटी देना जानता है, लेकिन महाराष्ट्र के गर्व और संस्कृति का सम्मान करना हर भारतीय की जिम्मेदारी है।


