मुंबई-पुणे में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन फॉर्म जमा करने में पिछड़ाव
Mumbai-Pune lags behind in submitting Special Intensive Revision Forms
वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर सामने आया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, ठाणे, पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में ऐसे एन्यूमरेशन फॉर्म की संख्या सबसे ज्यादा रही, जिन्हें चुनाव अधिकारियों द्वारा एकत्र नहीं किया जा सका।
मुंबई : वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर सामने आया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, ठाणे, पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में ऐसे एन्यूमरेशन फॉर्म की संख्या सबसे ज्यादा रही, जिन्हें चुनाव अधिकारियों द्वारा एकत्र नहीं किया जा सका।
वहीं दूसरी ओर, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के निर्वाचन क्षेत्रों ने फॉर्म जमा करने के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है। शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, कई ग्रामीण इलाकों में मतदाताओं ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी दिखाई और बड़ी संख्या में एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए गए।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करना है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाताओं से संबंधित जानकारी की पुष्टि की जाती है और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर सूची को संशोधित किया जाता है। चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान चलाता है।
महाराष्ट्र में चल रहे इस अभियान के दौरान चुनाव अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं से एन्यूमरेशन फॉर्म लेने की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, बड़े शहरों में कई जगहों पर फॉर्म जमा करने में चुनौतियां सामने आईं। आंकड़ों के अनुसार, ठाणे, पुणे और मुंबई जैसे महानगरीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाता ऐसे रहे, जिनके फॉर्म समय पर एकत्र नहीं हो पाए। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। शहरी इलाकों में लोगों का व्यस्त जीवन, नौकरी के कारण घर पर उपलब्ध नहीं होना और बड़ी संख्या में किराएदार आबादी होना प्रमुख वजहों में शामिल हैं।
मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे शहरों में बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग क्षेत्रों से आकर रहते हैं। कई मतदाता अपने स्थायी पते से अलग स्थानों पर निवास करते हैं। ऐसे में चुनाव कर्मियों को घर-घर जाकर सत्यापन करने और फॉर्म एकत्र करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।


