KDMC में होर्डिंग घोटाले का बड़ा खुलासा! 600 में करीब 400 होर्डिंग अवैध, 60 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान
Major hoarding scam uncovered in KDMC! Nearly 400 out of 600 billboards are illegal, estimated revenue loss of 60 crore rupees.
KDMC की जांच में कल्याण, डोंबिवली और टिटवाला क्षेत्र में करीब 400 अनधिकृत होर्डिंग्स पाए गए हैं। 2014 के बाद नई प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया नहीं होने के कारण महानगरपालिका को करीब ₹50–60 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान है। प्रशासन ने सर्वे, बकाया वसूली और अवैध होर्डिंग्स हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
कल्याण-डोंबिवली: कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) क्षेत्र में होर्डिंग्स को लेकर हुई जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि महानगरपालिका क्षेत्र में लगे करीब 600 होर्डिंग्स में से लगभग 400 होर्डिंग्स अनधिकृत हैं। इन अवैध होर्डिंग्स और वर्षों से नई निविदा प्रक्रिया नहीं होने के कारण महानगरपालिका को करीब ₹50 से ₹60 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
2014 के बाद नहीं हुई नई निविदा प्रक्रिया
महानगरपालिका की तदर्थ समिति की जांच में सामने आया कि होर्डिंग्स लगाने और उनके संचालन के लिए वर्ष 2014 के बाद नई प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया नहीं की गई। इसके बजाय पहले से काम कर रही एजेंसियों के अनुबंधों को बार-बार नवीनीकृत और आगे बढ़ाया जाता रहा।
समिति के अनुसार, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया होती तो महानगरपालिका को होर्डिंग्स से हर साल लगभग ₹10 से ₹15 करोड़ का राजस्व प्राप्त हो सकता था। फिलहाल इस माध्यम से करीब ₹4 करोड़ सालाना राजस्व मिलने की जानकारी सामने आई है।
कल्याण, डोंबिवली और टिटवाला में बड़ी संख्या में अवैध होर्डिंग
जांच में पाया गया कि अनधिकृत होर्डिंग्स केवल एक इलाके तक सीमित नहीं हैं। कल्याण, डोंबिवली और टिटवाला के प्रमुख रास्तों, व्यस्त चौराहों और रेलवे स्टेशन के आसपास बड़ी संख्या में अवैध विज्ञापन संरचनाएं लगी हुई हैं।
शुरुआत में महानगरपालिका के संपत्ति विभाग ने करीब 200 होर्डिंग्स को अनधिकृत बताया था। बाद की जांच और स्थल निरीक्षण के बाद यह संख्या बढ़कर करीब 400 तक पहुंच गई। यानी KDMC क्षेत्र में मौजूद कुल होर्डिंग्स का लगभग दो-तिहाई हिस्सा अनधिकृत पाए जाने का दावा किया गया है।
100 वर्गफुट की अनुमति, मौके पर 200 वर्गफुट के होर्डिंग
जांच के दौरान होर्डिंग्स के आकार को लेकर भी गंभीर अनियमितता सामने आई। समिति के अनुसार, 100 से अधिक होर्डिंग संचालकों ने 100 वर्गफुट के विज्ञापन ढांचे की अनुमति ली थी, लेकिन मौके पर निरीक्षण के दौरान कई जगह लगभग 200 वर्गफुट के होर्डिंग लगाए जाने की जानकारी सामने आई।
इससे यह सवाल भी उठाया गया कि अनुमति से अधिक बड़े होर्डिंग वर्षों तक प्रमुख स्थानों पर कैसे लगे रहे और संबंधित प्रशासनिक विभागों की निगरानी व्यवस्था क्यों प्रभावी नहीं रही।
पालिका को करोड़ों के राजस्व का नुकसान
समिति के अनुसार, यदि होर्डिंग्स के लिए नियमित और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई जाती तो KDMC को काफी अधिक राजस्व प्राप्त हो सकता था। जांच में अनुमान लगाया गया है कि पिछले वर्षों में प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया नहीं होने और अनधिकृत होर्डिंग्स के कारण महानगरपालिका को करीब ₹50–60 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ।
अब समिति ने इस पूरे मामले में राजस्व वसूली और अवैध होर्डिंग्स पर कार्रवाई को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।
अवैध होर्डिंग्स पर कार्रवाई की तैयारी
KDMC प्रशासन ने सभी होर्डिंग्स का वार्ड स्तर पर सर्वे और सत्यापन शुरू किया है। अनधिकृत होर्डिंग्स से बकाया शुल्क और अन्य देय राशि वसूलने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
इसके अलावा अवैध होर्डिंग्स को हटाने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है। एक होर्डिंग को हटाने में करीब ₹2 लाख तक का खर्च आने का अनुमान है। समिति ने सुझाव दिया है कि ठेकेदार अवैध संरचनाओं को हटाकर उनसे निकलने वाले कबाड़ से अपनी लागत की भरपाई कर सके, जिससे महानगरपालिका पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम हो।
नियमितीकरण के लिए सिर्फ 30 संचालक आगे आए
KDMC ने अनधिकृत होर्डिंग संचालकों को निर्धारित शुल्क और जरूरी दस्तावेज जमा कराकर अपने होर्डिंग नियमित कराने का अवसर भी दिया था। हालांकि, करीब 400 अनधिकृत होर्डिंग्स में से अब तक केवल 30 संचालकों ने नियमितीकरण के लिए आवेदन किया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले सभी अनधिकृत होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब जिम्मेदारी तय करने की मांग
होर्डिंग्स की संख्या, टेंडर प्रक्रिया और करोड़ों रुपये के अनुमानित राजस्व नुकसान के खुलासे के बाद KDMC की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। समिति ने पारदर्शी निविदा प्रक्रिया, नियमित निरीक्षण और राजस्व वसूली की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि KDMC प्रशासन अवैध होर्डिंग्स पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और वर्षों से कथित तौर पर जमा बकाया राशि की कितनी वसूली हो पाती है।


