मुंबई : फायर सेफ्टी के नाम पर खानापूर्ति; -३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी से बाहर
Mumbai: A mere formality in the name of fire safety; over 300,000 buildings are fire-safe.
मुंबई में गगनचुंबी इमारतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी आग से सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका जवाब बेहद डरावना है। मुंबई फायर ब्रिगेड के आंकड़ों के मुताबिक, शहर की ३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी के दायरे में पूरी तरह नहीं हैं। जनवरी से जून २०२६ के बीच महज ६,४४८ सोसाइटियों ने फॉर्म बी जमा किया यानी कुल इमारतों का लगभग २ फीसदी! सवाल सीधा है-बाकी ९८ फीसदी इमारतों में रहने वाले लाखों मुंबईकरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
मुंबई : मुंबई में गगनचुंबी इमारतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी आग से सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका जवाब बेहद डरावना है। मुंबई फायर ब्रिगेड के आंकड़ों के मुताबिक, शहर की ३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी के दायरे में पूरी तरह नहीं हैं। जनवरी से जून २०२६ के बीच महज ६,४४८ सोसाइटियों ने फॉर्म बी जमा किया यानी कुल इमारतों का लगभग २ फीसदी! सवाल सीधा है-बाकी ९८ फीसदी इमारतों में रहने वाले लाखों मुंबईकरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
विलेपार्ले-पश्चिम की शांता भुवन सोसाइटी में लगी आग ने इस लापरवाही की पोल खोल दी। वरिष्ठ अग्निशमन अधिकारियों के अनुसार, वहां फायर सेफ्टी सिस्टम का कुछ हिस्सा ही काम कर रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि हादसे के बाद दमकल की गाड़ी पहुंच भी जाए तो यदि अलार्म, उपकरण या आपातकालीन व्यवस्था ही न चले तो जान बचाएगा कौन?
नियम हैं, लेकिन कार्रवाई का डंडा कहां?
हर छह महीने में सेल्फ-सेफ्टी दाखिल करने की व्यवस्था है, लेकिन नियमों का पालन नहीं करने वालों पर दमकल विभाग सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता। स्टाफ की कमी के कारण हर इमारत का नियमित निरीक्षण भी मुश्किल है। न प्रभावी जुर्माना, न कड़ी कार्रवाई और न ही अनुपालन करने वालों के लिए कोई प्रोत्साहन—ऐसे में फायर सेफ्टी भी कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है।
मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। सरकार और मनपा को अब चेतना होगा। आग लगने के बाद दमकल भेजना समाधान नहीं; आग लगने से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा—हादसे से पहले या फिर लाशें गिनने के बाद?
फायर सेफ्टी बनी कागजी खानापूर्ति!
मुंबई में हजारों इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। फायर सेफ्टी के लिए जरूरी फॉर्म बी जमा करने वाली सोसाइटियों की संख्या बेहद कम है। स्टाफ की कमी और कमजोर कार्रवाई से नियमों का डर खत्म होता दिख रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक रैंडम जांच, भारी जुर्माना और सख्त कार्रवाई ही हादसों को रोक सकती है।


