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National 

खंडवा : मुंबई-अमरावती की गणेश मूर्तियों की धूम, 111 रूपों में गणपति बप्पा, नए ट्रेंड ने खींचा लोगों का ध्यान

खंडवा : मुंबई-अमरावती की गणेश मूर्तियों की धूम, 111 रूपों में गणपति बप्पा, नए ट्रेंड ने खींचा लोगों का ध्यान बाजार में गणपति बप्पा के कई अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं. कहीं भगवान गणेश गजमुख के स्वरूप में नजर आ रहे हैं तो कहीं दगड़ू सेठ और लालबाग के राजा की झलक दिखाई दे रही है. इसके अलावा इस्कॉन के स्वरूप, भजन करते गणपति, राधा-कृष्ण थीम और ब्राह्मण बैठक जैसे कई नए डिजाइन भी बाजार में मौजूद हैं.
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National 

दिल्ली-मुंबई हो या पटना, निर्भया कानून के बाद भी क्यों नहीं कम हो रहीं रेप की घटना 

दिल्ली-मुंबई हो या पटना, निर्भया कानून के बाद भी क्यों नहीं कम हो रहीं रेप की घटना  3 साल की मासूम के साथ स्कूल वैन के ड्राइवर ने दरिंदगी की.स्कूल से लौटते वक्त जब नन्ही बच्ची वैन में अकेली थी तो ड्राइवर के अंदर बैठा दानव जाग गया और उसने अपनी हवस का शिकार इस मासूम को बना डाला. इससे पहले खबर आई कि बिहार के बक्सर में स्कूल के शिक्षकों ने ही छात्राओं के साथ दुष्कर्म किया.
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Maharashtra 

मुंबई: मनोज जरांगे ने फिर दी आंदोलन की चेतावनी, कहा- मुंबई में प्रदर्शन किया तो न ट्रेन चलेगी और ना उड़ेंगे प्लेन

मुंबई: मनोज जरांगे ने फिर दी आंदोलन की चेतावनी, कहा- मुंबई में प्रदर्शन किया तो न ट्रेन चलेगी और ना उड़ेंगे प्लेन मराठा समुदाय को धमकाने का आरोप लगाकर महाराष्ट्र सरकार को गंभीर नतीजों की चेतावनी देते हुए, मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बुधवार को कहा कि यदि वह मुंबई में विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय करते हैं, तो 80 से 90 लाख युवा उनके साथ जुड़ेंगे और न तो हवाई जहाज उड़ने देंगे और न ही ट्रेनें चलने देंगे। हालांकि, जरांगे ने ये भी कहा कि अगर महाराष्ट्र सरकार मराठा समुदाय को उनका हक दे देती है, तो उन्हें मुंबई में प्रदर्शन करने में कोई दिलचस्पी नहीं है।  
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Mumbai 

मुंबई : फायर सेफ्टी के नाम पर खानापूर्ति; -३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी से बाहर

मुंबई : फायर सेफ्टी के नाम पर खानापूर्ति; -३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी से बाहर मुंबई में गगनचुंबी इमारतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी आग से सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका जवाब बेहद डरावना है। मुंबई फायर ब्रिगेड के आंकड़ों के मुताबिक, शहर की ३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी के दायरे में पूरी तरह नहीं हैं। जनवरी से जून २०२६ के बीच महज ६,४४८ सोसाइटियों ने फॉर्म बी जमा किया यानी कुल इमारतों का लगभग २ फीसदी! सवाल सीधा है-बाकी ९८ फीसदी इमारतों में रहने वाले लाखों मुंबईकरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?  
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