महाराष्ट्र में 36,211 कंपनियां बंद होने के दावे पर फडणवीस का पलटवार, बोले- 76% कंपनियां पहले से ही निष्क्रिय थीं
Fadnavis countered the claim that 36,211 companies were closed in Maharashtra, saying that 76% of the companies were already inactive.
महाराष्ट्र में 36,211 कंपनियों के बंद होने के दावे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि करीब 76 फीसदी कंपनियां पहले से ही निष्क्रिय थीं और उन्होंने कारोबार शुरू नहीं किया था। फडणवीस के मुताबिक, महाराष्ट्र में 3.96 लाख से अधिक पंजीकृत कंपनियां हैं और 2025-26 में 41,525 नई कंपनियां पंजीकृत हुईं।
मुंबई: महाराष्ट्र में हजारों कंपनियों के बंद होने को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार के दावे पर जवाब दिया है। फडणवीस ने कहा कि राज्य में 36,211 कंपनियों के बंद होने का आंकड़ा बिना पूरे संदर्भ के पेश किया जा रहा है और इनमें से करीब 76 फीसदी कंपनियां ऐसी थीं, जिन्होंने कभी अपना कारोबार शुरू ही नहीं किया था।
फडणवीस ने कहा कि कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द होने और किसी सक्रिय औद्योगिक इकाई के राज्य से बाहर चले जाने को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता। उनके मुताबिक, उपलब्ध आंकड़ों को सही संदर्भ में देखने पर महाराष्ट्र से बड़े पैमाने पर उद्योगों के पलायन की तस्वीर सामने नहीं आती।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा सक्रिय कंपनियां
मुख्यमंत्री के मुताबिक, 3 जून तक महाराष्ट्र में 3,96,211 पंजीकृत कंपनियां थीं, जो देश के किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अधिक हैं। उन्होंने इसे महाराष्ट्र के मजबूत कारोबारी और औद्योगिक आधार का संकेत बताया।
फडणवीस ने यह भी बताया कि 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र में 41,525 नई कंपनियां पंजीकृत हुईं। उनका कहना है कि केवल बंद या निष्क्रिय कंपनियों की संख्या बताने से राज्य में निवेश और उद्योगों की वास्तविक स्थिति का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता।
36,211 कंपनियों के आंकड़े पर क्या है विवाद?
महाराष्ट्र में 36,211 कंपनियों के बंद होने का आंकड़ा सामने आने के बाद राज्य की औद्योगिक स्थिति को लेकर सवाल उठे थे। इसे लेकर विपक्ष की ओर से सरकार पर उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाए रखने में विफल रहने के आरोप लगाए गए।
फडणवीस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि बंद कंपनियों की सूची में बड़ी संख्या ऐसी संस्थाओं की है, जो पंजीकरण के बावजूद वास्तविक रूप से सक्रिय नहीं थीं। उनके अनुसार, करीब 76 फीसदी कंपनियां “defunct” श्रेणी में थीं और उन्होंने अपना कारोबार शुरू नहीं किया था।
उद्योगों के पलायन के दावे पर सरकार का जवाब
फडणवीस का जवाब ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में उद्योगों और निवेश को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्ष राज्य से कंपनियों और औद्योगिक परियोजनाओं के बाहर जाने के मुद्दे को सरकार के सामने उठा रहा है।
मुख्यमंत्री का तर्क है कि कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द होने को सीधे तौर पर उद्योगों के महाराष्ट्र छोड़ने से जोड़ना सही नहीं होगा। उन्होंने राज्य में नई कंपनियों के लगातार पंजीकरण और बड़ी संख्या में सक्रिय कंपनियों की मौजूदगी को सरकार के पक्ष में महत्वपूर्ण आंकड़ा बताया।
सरकार ने पेश किया निवेश का पक्ष
फडणवीस ने महाराष्ट्र को देश का प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी केंद्र बताते हुए कहा कि राज्य में कंपनियों का आधार लगातार मजबूत बना हुआ है। बड़ी संख्या में नई कंपनियों का पंजीकरण इस बात का संकेत है कि महाराष्ट्र अभी भी कारोबार और निवेश के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य बना हुआ है।
वहीं, राजनीतिक विवाद के बीच अब बहस इस बात पर केंद्रित हो गई है कि कंपनियों के बंद होने, रजिस्ट्रेशन रद्द होने और वास्तविक औद्योगिक पलायन के आंकड़ों को अलग-अलग कैसे देखा जाए।
शरद पवार के दावे पर फडणवीस का सीधा जवाब
शरद पवार द्वारा उठाए गए मुद्दे पर फडणवीस के जवाब के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उद्योग, निवेश और रोजगार का मुद्दा केंद्र में आ गया है। दोनों पक्षों के आंकड़ों और दावों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।
फिलहाल सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि 36,211 कंपनियों का आंकड़ा अपने आप में महाराष्ट्र से उद्योगों के बड़े पैमाने पर पलायन का प्रमाण नहीं है, क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में ऐसी कंपनियां शामिल थीं जो पहले से निष्क्रिय थीं।


