उत्तर प्रदेश : राहुल गांधी से मिलेंगे स्वामी प्रसाद मौर्य... कांग्रेस में हो सकते हैं शामिल
Uttar Pradesh: Swami Prasad Maurya to meet Rahul Gandhi... may join the Congress.
स्वामी प्रसाद मौर्या उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बेहद प्रभावशाली और चर्चित ओबीसी चेहरा रहे हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता दल से की थी और बाद में बहुजन समाज पार्टी में लंबे समय तक रहे. 2016 में वे बसपा छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री (श्रम एवं सेवायोजन) बने.
उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण सामने आ रहे हैं. जिसमें पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस में शामिल होने की खबर सामने आ रही है. राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक स्वामी प्रसाद मौर्य आज (शनिवार) राहुल गांधी से मुलाकात के बाद पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं. राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य दिल्ली पहुंच चुके हैं, जहां उनकी मुलाकात राहुल गांधी से होगी. यूपी जैसे राज्य में ओबीसी वोटरों को लुभाने के लिए कांग्रेस ये दांव खेल सकती है.
स्वामी प्रसाद मौर्या उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बेहद प्रभावशाली और चर्चित ओबीसी चेहरा रहे हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता दल से की थी और बाद में बहुजन समाज पार्टी में लंबे समय तक रहे. 2016 में वे बसपा छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री (श्रम एवं सेवायोजन) बने.
2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामा. सपा में कुछ समय तक विधान परिषद सदस्य रहने और मतभेदों के चलते उन्होंने बाद में सपा से भी इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी 'राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी' बनाई थी.
उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में अभी कांग्रेस के पास कोई ओबीसी चेहरा नहीं है. स्वामी प्रसाद मौर्य पुराने नेता हैं और उनके पूरे यूपी में कई इलाकों में प्रभाव है, जिसका फायदा कांग्रेस पार्टी उठाना चाहेगी. कांग्रेस के यूपी प्रभारी के रूप में राजेन्द्र पाल गौतम एससी वर्ग से आते हैं. अब आराधना मिश्रा मोना सवर्ण हैं तो पिछड़ी जाति के लिए मौर्य बेहतर साबित हो सकते हैं.
वहीं कुछ जानकार उनके कांग्रेस में शामिल होने से सपा से गठबंधन में कुछ शंका जाहिर कर रहे हैं. क्योंकि एक समय स्वामी प्रसाद मौर्य अखिलेश यादव के नजदीकी थे, लेकिन बीते कुछ समय से वे दूर हैं. क्या अखिलेश यादव उनकी कांग्रेस में एंट्री को अपनी रणनीति में जगह देंगे ये भी देखने वाली बात होगी.


