NEET के बाद अब शिक्षा सुधार पर CJP का फोकस: अभिजीत दिपके ने पूरे देश में लॉन्च किया 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान

After NEET, CJP now focuses on education reform: Abhijeet Dipke launches nationwide 'Kya Bolti Public' campaign

NEET के बाद अब शिक्षा सुधार पर CJP का फोकस: अभिजीत दिपके ने पूरे देश में लॉन्च किया 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान

NEET आंदोलन के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छत्रपति संभाजीनगर में राष्ट्रव्यापी अभियान 'क्या बोलती पब्लिक' की शुरुआत की है। इस अभियान का पहला चरण शिक्षा में सुधार, स्कूल-कॉलेज और कोचिंग की बढ़ती फीस पर लगाम लगाने तथा शिक्षा को व्यापार बनने से रोकने पर केंद्रित होगा।

नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली और पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर महीने भर चले विरोध प्रदर्शन की सफलता के बाद 'कॉक्रोच जनता पार्टी' (CJP) ने अपने अगले बड़े कदम का ऐलान किया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) में दो दिवसीय कोर टीम बैठक के बाद एक राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान 'क्या बोलती पब्लिक' (Kya Bolti Public) लॉन्च करने की घोषणा की है।

​अभिजीत दिपके ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देश के आम नागरिकों से सीधे जुड़कर उनकी वास्तविक समस्याओं और मुद्दों को समझना है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत CJP का सबसे पहला और मुख्य ध्यान शिक्षा सुधार (Education Reform) पर होगा।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रमुख बातें:
  • शिक्षा बनी अत्यधिक महंगी: दिपके ने कहा कि आज देश में शिक्षा आम और गरीब परिवारों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। पहली कक्षा के बच्चों की सालाना फीस ही ₹1 लाख से ₹2 लाख तक पहुंच गई है, ऊपर से डोनेशन का बोझ अलग है।
  • कोचिंग व कॉलेज फीस का बोझ: कॉलेज और कोचिंग संस्थानों की अत्यधिक फीस परिवारों को कर्ज (Loans) के जाल में धकेल रही है। CJP का लक्ष्य परिवारों को इस आर्थिक बोझ से राहत दिलाना है।
  • डॉ. आंबेडकर के विचारों का हवाला: डॉ. बी.आर. आंबेडकर का जिक्र करते हुए दिपके ने कहा कि शिक्षा हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसे एक व्यापार बना दिया गया है।
  • लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल: दिपके ने आरोप लगाया कि आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं से भरोसा उठ रहा है। अदालतें राजनीतिक दलों के विधायकों की खरीद-फरोख्त और विभाजन के मामलों पर तुरंत फैसले देती हैं, लेकिन आम नागरिकों को न्याय के लिए तारीख पर तारीख मिलती है।

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