महाराष्ट्र : जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड में सुधार और रह करने के नियम सख्त, महाराष्ट्र सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की...
Maharashtra: Rules for rectifying birth and death records and for making corrections have been tightened; the Maharashtra government has issued new guidelines...
पंजीकरण के बाद नाम बदलने की स्थिति में आवेदन और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद रिमार्क्स कॉलम में 'उर्फ' शब्द का इस्तेमाल प्राथमिकता से करने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जन्म या मृत्यु के बाद परिस्थितियों में बदलाव होने मात्र से रिकॉर्ड में संशोधन नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, जन्म पंजीकरण के बाद माता-पिता बच्चे का नाम बदलकर उसे राजपत्र में प्रकाशित करते हैं, तो यह बदलाव धारा 15 के तहत नहीं आता और इसे जन्म रिकॉर्ड में शामिल करना जरूरी नहीं है।
मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने जन्म और मृत्यु रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियों में सुधार या उन्हें रद्द करने के लिए नई विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया को और सख्त किया गया है। अब रजिस्ट्रार अपनी ओर से किसी जन्म या मृत्यु रिकॉर्ड को रद्द नहीं कर सकेंगे। इसके लिए मुख्य रजिस्ट्रार की मंजूरी अनिवार्य होगी। स्वास्थ्य सेवा निदेशालय एवं महाराष्ट्र के जन्म-मृत्यु के मुख्य रजिस्ट्रार की ओर से 4 सितंबर को जारी यह गाइडलाइन जन्म मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 15 तथा महाराष्ट्र जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियम, 2000 के नियम 11 पर आधारित है। नियमों में 2026 में संशोधन किया गया है।
रिकॉर्ड में सुधार के लिए संबंधित व्यक्ति से पहले लिखित आवेदन लेना होगा। इसके बाद रजिस्ट्रार मूल दस्तावेजों और जन्म या मृत्यु रजिस्टर में दर्ज जानकारी का सत्यापन करेंगे। वर्तनी की गलती या अन्य लिपिकीय त्रुटि होने पर दस्तावेजों की जांच के बाद सुधार किया जा सकेगा। हालांकि, मूल प्रविष्टि को रजिस्टर से मिटाया या बदला नहीं जाएगा। सुधार की जानकारी रिमार्क्स कॉलम में दर्ज कर रजिस्ट्रार को उस पर हस्ताक्षर और तारीख डालनी होगी। सुधार के लिए इस्तेमाल किए गए सभी दस्तावेजों को रजिस्टर का हिस्सा बनाकर स्थायी रूप से सुरक्षित रखना होगा। इसके अलावा, सुधार के संबंध में सूचक के हस्ताक्षर भी लिए जाएंगे।
सरकार ने जन्म रिकॉर्ड में नाम बदलने के मामलों में भी विशेष सावधानी बरतने को कहा है। पंजीकरण के बाद नाम बदलने की स्थिति में आवेदन और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद रिमार्क्स कॉलम में 'उर्फ' शब्द का इस्तेमाल प्राथमिकता से करने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जन्म या मृत्यु के बाद परिस्थितियों में बदलाव होने मात्र से रिकॉर्ड में संशोधन नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, जन्म पंजीकरण के बाद माता-पिता बच्चे का नाम बदलकर उसे राजपत्र में प्रकाशित करते हैं, तो यह बदलाव धारा 15 के तहत नहीं आता और इसे जन्म रिकॉर्ड में शामिल करना जरूरी नहीं है। बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता के तलाक होने पर केवल इस आधार पर जन्म रिकॉर्ड से पिता का नाम नहीं हटाया जा सकेगा। जन्म रिकॉर्ड में बच्चे के जन्म के समय की स्थिति दर्ज होती है।


