मुंबई ब्लास्ट, बाटला हाउस कांड और अहमदाबाद धमाकों के बाद से जांच एजेंसियों के रडार पर रहता है आजमगढ़ जिला
Azamgarh district has been on the radar of investigating agencies since the Mumbai blasts, Batla House incident and Ahmedabad blasts.
देश की कई बड़ी आतंकी घटनाओं की जांच में आजमगढ़ का नाम सामने आता रहा है। मुंबई सीरियल ब्लास्ट, वाराणसी और गोरखपुर धमाके, फैजाबाद, अहमदाबाद ब्लास्ट, बाटला हाउस मुठभेड़ और आईएसआईएस मॉड्यूल से जुड़े मामलों में जिले के कुछ व्यक्तियों और क्षेत्रों का नाम जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में दर्ज हुए हैं।
मुंबई : देश की कई बड़ी आतंकी घटनाओं की जांच में आजमगढ़ का नाम सामने आता रहा है। मुंबई सीरियल ब्लास्ट, वाराणसी और गोरखपुर धमाके, फैजाबाद, अहमदाबाद ब्लास्ट, बाटला हाउस मुठभेड़ और आईएसआईएस मॉड्यूल से जुड़े मामलों में जिले के कुछ व्यक्तियों और क्षेत्रों का नाम जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में दर्ज हुए हैं।
जब बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ तो जिला सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहने लगा। इसी कड़ी में मोहम्मद नबील भी शामिल है, जिसे एटीएस ने शनिवार को दीदारगंज थाना क्षेत्र के चितारा महमूदपुर से गिरफ्तार किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की वांटेड सूची में आजमगढ़ जनपद से जुड़े सात संदिग्धों के नाम शामिल हैं। ये नाम विभिन्न आतंकी मामलों और इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) से जुड़े प्रकरणों की जांच के दौरान सामने आए थे।
सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इनकी तलाश में जुटी हैं। एनआईए की वांटेड सूची में सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर निवासी मोहम्मद साजिद, मोहम्मद खालिद, शाहनवाज आलम, सदाब अहमद, अबू रशीद और मोहम्मद राशिद के अलावा कोतवाली क्षेत्र के राजा का किला मोहल्ला निवासी मिर्जा शादाब बेग का नाम शामिल है।
जांच एजेंसियों के अनुसार इन व्यक्तियों के नाम विभिन्न आतंकी घटनाओं और प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े मामलों की जांच के दौरान प्रकाश में आए थे। एजेंसियां इनके संभावित ठिकानों, संपर्क सूत्रों और गतिविधियों की लगातार निगरानी करती रही हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के निर्णय के बाद ही होती है।
काफी दिनों से चल रही एटीएस यूनिट के स्थापना की कवायद
एटीएस यूनिट की स्थापना के लिए जनपद में काफी दिनों से कवायद चल रही है। इसके लिए मंदुरी में जमीन भी मिल चुकी है लेकिन, अभी तक जमीन पर कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है। इसके स्थापित होने के बाद पूर्वांचल में सुरक्षा एजेंसियों को एक स्थायी आधार मिलेगा। इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर टीमों को लखनऊ या अन्य स्थानों से आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी।


