मुंबई की मेयर रितू तावड़े ने खत्म की विशाखा राउत की पार्षदी, उद्धव ठाकरे को करारा झटका, जानें वजह
Mumbai Mayor Ritu Tawde terminates Vishakha Raut's councilor, Uddhav Thackeray's deal, know the reason
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव हुए अभी साल भी पूरा नहीं हुआ है और उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी को करारा झटका लगा है। मुंबई की मेयर रह चुकीं विशाखा राउत की सदस्यता को बीएमसी ने रद्द कर दिया है। वह दादर के वार्ड नंबर 191 से चुनी गई थीं। यह सीट ओबीसी के लिए आरक्षित थी। विशाखा राउत ने जो जाति प्रमाण पत्र जमा किया था। उसे अवैध घोषित किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। बीएमसी ने विशाखा राउत के छह साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी है। पालघर में बने उनके ओबीसी सर्टिफिकेट को आमान्य घोषित किया गया था।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव हुए अभी साल भी पूरा नहीं हुआ है और उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी को करारा झटका लगा है। मुंबई की मेयर रह चुकीं विशाखा राउत की सदस्यता को बीएमसी ने रद्द कर दिया है। वह दादर के वार्ड नंबर 191 से चुनी गई थीं। यह सीट ओबीसी के लिए आरक्षित थी। विशाखा राउत ने जो जाति प्रमाण पत्र जमा किया था। उसे अवैध घोषित किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। बीएमसी ने विशाखा राउत के छह साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी है। पालघर में बने उनके ओबीसी सर्टिफिकेट को आमान्य घोषित किया गया था।
बीएमसी ने छह साल की लगाई रोक
विशाखा राउत ने दादर के वार्ड नंबर 191 से बीएमसी का चुनाव लड़ा था, जो कि ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षित सीट थी। चुनाव जीतने के बाद राउत के प्रतिद्वंद्वी शिंदे गुट के सदा सरवणकर की बेटी प्रिया सरवणकर ने शिकायत दर्ज कराई थी। पालघर जिला जाति प्रमाणपत्र जांच समिति ने पाया कि उनका कुनबी (ओबीसी) प्रमाण पत्र गलत क्षेत्राधिकार से जारी किया गया था, जिसके कारण समिति ने उसे अमान्य घोषित कर दिया। मुंबई नगर निगम अधिनियम के नियमों के तहत यदि किसी निर्वाचित पार्षद का जाति प्रमाण पत्र अमान्य हो जाता है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। इसके आधार पर महाराष्ट्र के नगर विकास विभाग ने अधिसूचना जारी कर उन्हें 20 अगस्त 2026 से पार्षद पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया और 6 साल का प्रतिबंध लगा दिया। 7 सितंबर 2026 को बीएमसी सदन में मुंबई की मेयर रितू तावड़े ने इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी।
कौन हैं विशाखा राउत
विशाखा राउत1990 के दशक में बीएमसी की राजनीति में सक्रिय हुईं और 1997 में मुंबई की महापौर बनीं। इसके बाद 1999 में उन्होंने दादर विधानसभा सीट से चुनाव जीता और 2004 तक महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य रहीं। यानी बीएमसी से लेकर विधानसभा और फिर दोबारा मुंबई की स्थानीय राजनीति तक उनका प्रभाव बना रहा। राउत को शिवसेना के पुराने संगठन और दादर-शिवाजी पार्क इलाके की राजनीति की अच्छी समझ रखने वाला नेता माना जाता रहा है। 2026 के बीएमसी चुनाव में वह शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के टिकट पर वार्ड 191 से मैदान में उतरीं। 167 वोट से जीत हासिल की। चुनाव के बाद उनके जाति प्रमाणपत्र की वैधता को चुनौती दी गई। शिकायत प्रिया सरवणकर की ओर से की गई थी। मामला पालघर जिला जाति प्रमाणपत्र जांच समिति के पास पहुंचा। जांच में प्रमाण पत्र को आमान्य करार दिया गया।


