दिल्ली-मुंबई हो या पटना, निर्भया कानून के बाद भी क्यों नहीं कम हो रहीं रेप की घटना
Even after Delhi-Mumbai, Patna, Nirbhaya law, rape cases are not decreasing
3 साल की मासूम के साथ स्कूल वैन के ड्राइवर ने दरिंदगी की.स्कूल से लौटते वक्त जब नन्ही बच्ची वैन में अकेली थी तो ड्राइवर के अंदर बैठा दानव जाग गया और उसने अपनी हवस का शिकार इस मासूम को बना डाला. इससे पहले खबर आई कि बिहार के बक्सर में स्कूल के शिक्षकों ने ही छात्राओं के साथ दुष्कर्म किया.
दिल्ली : 3 साल की मासूम के साथ स्कूल वैन के ड्राइवर ने दरिंदगी की.स्कूल से लौटते वक्त जब नन्ही बच्ची वैन में अकेली थी तो ड्राइवर के अंदर बैठा दानव जाग गया और उसने अपनी हवस का शिकार इस मासूम को बना डाला. इससे पहले खबर आई कि बिहार के बक्सर में स्कूल के शिक्षकों ने ही छात्राओं के साथ दुष्कर्म किया. वहीं उससे ठीक पहले नोएडा से दिल्ली के बीच 47 किलोमीटर की दूरी में 16 साल की छात्रा के साथ हुए सामूहिक रेप की घटना ने भले ही सनसनी फैला दी हो, लेकिन इस सवाल का जवाब अभी तक नहीं मिला है कि रेप की घटनाएं भारत में रुक क्यों नहीं रहीं? स्कूल की वैन हो, बस हो या खुद स्कूल हो आखिर हमारी बच्चियां कहां सुरक्षित हैं? जवाब है कहीं नहीं.
पिछले 10 दिन की घटनाओं पर गौर करें तो दिल्ली-मुंबई-पटना तीनों ही राजधानियां हैं चाहे देश की या राज्यों की. इन बड़े शहरों की चकाचौंध के बीच फिलहाल जो एक बात कॉमन रही, वह है इनसे आईं बलात्कार की घटनाएं. कहीं शिक्षक तो कहीं वैन ड्राइवर तो कहीं बस चालक के रूप में घूमते इन दरिंदों का शरीर भले ही मानवों का रहा हो, लेकिन इनकी आत्मा में शैतान ही था और इन हैवानों की शिकार बनीं हमारी-आपकी बेटियां. यह कोई पहली घटना नहीं है, दसवीं और सौवीं भी नहीं, बल्कि इससे पहले अनगिनत रेप, सामूहिक रेप, यौन उत्पीडन की घटनाएं हो चुकी हैं और लगातार हो रही हैं. जब भी ऐसी घटना सामने आती है फिर-फिर कर यही सवाल उठते हैं कि ये रेप क्यों नहीं रुक रहे? इन रेपिस्ट को तुरंत मार क्यों नहीं देते? बलात्कारियों में कानून का डर क्यों नहीं है? क्या हमारे भारत में सख्त कानून नहीं है? क्या 2012 के निर्भया कांड के बाद भी भारत में कुछ नहीं बदला?
आपको याद हो तो 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुई निर्भया के साथ हुई बर्बरता की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इसने सिर्फ गुस्सा नहीं जगाया, बल्कि कानून व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग भी खड़ी कर दी थी. युवा सड़कों पर उतर आए थे, विदेशों तक इस घटना की गूंज थी, कमेटियां बनाई गईं, जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिशों के आधार पर आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 पारित हुआ, जिसे आम भाषा में निर्भया कानून या निर्भया एक्ट कहा गया. निर्भया फंड बना, लेकिन सवाल फिर वही कि असल धरातल पर क्या हुआ?


