मुंबई : पश्चिम रेलवे ने स्टेशनों के 22 खाने-पीने की स्टॉल बंद, बांद्रा के 11 शामिल
Mumbai: Western Railway shuts down 22 food stalls at stations, including 11 in Bandra.
महाराष्ट्र में खाने-पीने की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर एफडीए कमिश्नर आईएएस तुकराम मुंढे की कार्रवाई के बाद अब पश्चिम रेलवे भी सतर्क हो गया है। रेलवे के स्टेशनों पर खाने-पीने की दुकानों की जांच शुरू कर दी गई है। इसी कार्रवाई के तहत बांद्रा स्टेशन की 11 दुकानें बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा ग्रांट रोड की 4, लोअर परेल की 3, चरनी रोड की 2 और मरीन लाइंस की 2 दुकानों समेत कुछ अन्य स्टेशनों के स्टॉल भी बंद कर दिए गए है। जानकारी के अनुसार, अब दूसरे स्टेशनों के खाने-पीने के स्टॉल भी पश्चिम रेलवे के रडार पर हैं और उनकी जल्द जांच की जा सकती है।
मुंबई : महाराष्ट्र में खाने-पीने की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर एफडीए कमिश्नर आईएएस तुकराम मुंढे की कार्रवाई के बाद अब पश्चिम रेलवे भी सतर्क हो गया है। रेलवे के स्टेशनों पर खाने-पीने की दुकानों की जांच शुरू कर दी गई है। इसी कार्रवाई के तहत बांद्रा स्टेशन की 11 दुकानें बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा ग्रांट रोड की 4, लोअर परेल की 3, चरनी रोड की 2 और मरीन लाइंस की 2 दुकानों समेत कुछ अन्य स्टेशनों के स्टॉल भी बंद कर दिए गए है। जानकारी के अनुसार, अब दूसरे स्टेशनों के खाने-पीने के स्टॉल भी पश्चिम रेलवे के रडार पर हैं और उनकी जल्द जांच की जा सकती है।
क्यों बंद हुए रेलवे के स्टॉल
नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि अधिकांश वे स्टॉल बंद किए गए हैं, जहां छोले, समोसा, वड़ा समेत अन्य तैयार खाने -पीने की चीज़ें बेचे जा रहे थे। जांच के दौरान इन दुकानों में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता मानकों के अनुसार नहीं पाई गई। कई दुकानों में साफ-सफाई की स्थिति भी खराब थी। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ स्टॉल पर काम करने वाले कर्मचारियों के पास जरूरी मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं थे। एक दुकान में चार कर्मचारी काम करते पाए गए, लेकिन मेडिकल सर्टिफिकेट सिर्फ दो कर्मचारियों के पास था। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दुकानों पर कार्रवाई की गई। उन्हें उनकी गलती सुधारने के लिए कुछ समय दिया गया है। फिलहाल सिर्फ पैकेज फ़ूड का आइटम ही स्टाल पर मिल रहा है।
जनवरी से जुलाई तक 1,523 जांच का दावा
हालांकि, पश्चिम रेलवे का कहना है कि उसके अधिकारी और सुपरवाइजर समय-समय पर स्टेशनों पर मौजूद खाने-पीने के स्टॉल की जांच करते रहते हैं। पश्चिम रेलवे के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 1,523 रेगुलर और सरप्राइज जांच की गई हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में दुकानों में गुणवत्ता, स्वच्छता और कर्मचारियों के मेडिकल प्रमाणपत्र से जुड़ी खामियां मिलने के बाद रेलवे की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।


