महाराष्ट्र : मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमाने लगा; आंदोलन से पहले रखी बड़ी मांग, 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन अनशन
Mumbai: Maratha reservation issue heats up again; major demands made before agitation
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमाने लगा है। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे **मनोज जरांगे पाटिल** ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। उन्होंने पात्र मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ दिलाने की मांग दोहराते हुए **29 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल** शुरू करने की घोषणा की है। इससे पहले वह मराठवाड़ा और विदर्भ के विभिन्न इलाकों का दौरा कर समुदाय के लोगों से संपर्क करेंगे।
मुंबई: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमाने लगा है। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे **मनोज जरांगे पाटिल** ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। उन्होंने पात्र मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ दिलाने की मांग दोहराते हुए **29 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल** शुरू करने की घोषणा की है। इससे पहले वह मराठवाड़ा और विदर्भ के विभिन्न इलाकों का दौरा कर समुदाय के लोगों से संपर्क करेंगे।
जरांगे ने सरकार के सामने एक प्रमुख मांग रखते हुए कहा है कि मराठा समुदाय से जुड़े जिन लोगों के **58 लाख रिकॉर्ड** मिले हैं, उनके आधार पर पात्र लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन रिकॉर्ड की संख्या कम करने की कोशिश कर रही है। हालांकि यह जरांगे का आरोप है और सरकार का विस्तृत पक्ष इस पर महत्वपूर्ण रहेगा।
29 अगस्त से अनिश्चितकालीन अनशन
मनोज जरांगे ने स्पष्ट किया है कि मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों का समाधान नहीं होने पर वह 29 अगस्त से फिर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे। इससे पहले **20 से 25 अगस्त** के बीच वह मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ हिस्सों का दौरा करने वाले हैं। उनका प्रयास आंदोलन से पहले मराठा समुदाय को एकजुट करने का है। उन्होंने समुदाय के लोगों से अपनी मांगों को लेकर मजबूती से खड़े रहने और किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के दबाव में नहीं आने की अपील की है।
जरांगे पहले भी मराठा आरक्षण को लेकर कई बार अनशन कर चुके हैं। उनके आंदोलनों के कारण महाराष्ट्र की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। क्या है 58 लाख रिकॉर्ड का मामला? इस बार आंदोलन का एक प्रमुख मुद्दा **58 लाख कथित रिकॉर्ड** हैं। जरांगे का कहना है कि सरकार की जांच में ऐसे रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे बड़ी संख्या में मराठा समुदाय के लोगों की कुनबी पहचान से संबंधित दावे सामने आते हैं।
उनकी मांग है कि इन रिकॉर्ड के आधार पर जो लोग निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक कसौटियों पर पात्र पाए जाते हैं, उन्हें कुनबी जाति प्रमाणपत्र दिया जाए, ताकि वे ओबीसी आरक्षण के तहत मिलने वाले लाभ प्राप्त कर सकें। जरांगे ने चेतावनी दी है कि वह इन रिकॉर्ड की संख्या को कथित तौर पर कम किए जाने को स्वीकार नहीं करेंगे। कुनबी प्रमाणपत्र क्यों है महत्वपूर्ण? महाराष्ट्र में कुनबी समुदाय ओबीसी श्रेणी में शामिल है। इसी कारण मराठा आरक्षण आंदोलन में कुनबी प्रमाणपत्र का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।


