मुंबई : दो बिल्डरों को पजेशन ना देने की वजह से हो गई जेल 

Mumbai: Two builders jailed for not giving possession

मुंबई : दो बिल्डरों को पजेशन ना देने की वजह से हो गई जेल 

महाराष्ट्र के मुंबई से एक मामला सामने आया है, जिसमें दो बिल्डरों को एक फ्लैट का पजेशन ना लौटा पाने की वजह स जेल की सजा काटना पड़ेगी. इतनी ही नहीं इसके साथ दोनों को 10-10 हजार रुपये जुर्माने के रूप में भी देना होगा. 

 

मुंबई : महाराष्ट्र के मुंबई से एक मामला सामने आया है, जिसमें दो बिल्डरों को एक फ्लैट का पजेशन ना लौटा पाने की वजह स जेल की सजा काटना पड़ेगी. इतनी ही नहीं इसके साथ दोनों को 10-10 हजार रुपये जुर्माने के रूप में भी देना होगा. 

 

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क्या है पूरा मामला?
दरअसल ये मामला मुंबई के कुर्ला स्थित स्टर्लिंग अपार्टमेंट्स का है. जहां सुनील सदानंद वैती और उनकी पत्नी कीर्ति सुनील वैती ने समीर जियाउद्दीन और सरोश खान की शिकायत कंज्यूमर फोरम में की थी. उनकी शिकायत पर आयोग ने पहले बिल्डरों को फ्लैट ए-701 का काम पूरा करने, जरूरी ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और बिल्डिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने और इसके बाद खरीदारों को फ्लैट का कानूनी कब्जा देने का आदेश दिया था.

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इतना ही नहीं आयोग ने खरीदारों को बाकी 14.50 लाख रुपये और कुछ अन्य शुल्क मिलाकर पूरे 15 लाख रुपये देने को कहा था. साथ ही बिल्डरों को 16.50 लाख रुपये पर 30 अगस्त 2013 से कब्जा मिलने तक 21 प्रतिशत सालाना ब्याज देने और खरीदारों को मानसिक व शारीरिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया था.

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बिल्डरों ने नहीं किया आदेश का पालन
आयोग के आदेश के कुछ समय के बाद ही खरीदारों ने दोबारा शिकायत की, कि बिल्डरों ने आयोग के आदेश का पालन नहीं किया. जिस पर बिल्डरों ने सफाई दी कि जमीन की सीमा और नियमों में बदलाव के कारण बिल्डिंग का प्लान बदलना पड़ा. उन्होंने नए प्लान और जरूरी मंजूरियों के लिए आवेदन करने की बात भी कही. हालांकि, सुनवाई के दौरान समीर खान ने माना कि फ्लैट का कब्जा खरीदारों को दिया जा चुका था, लेकिन ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं लिया गया था. 

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आयोग ने सुनाई सजा
जिस पर आयोग ने कहा कि बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के दिया गया कब्जा कानूनी कब्जा नहीं माना जा सकता. आयोग ने ये भी माना कि बिल्डरों ने पहले के आदेश का जानबूझकर पालन नहीं किया. तो वहीं आयोग ने ये भी कहा कि बिल्डरों को आदेश का पालन करने के लिए काफी समय मिला था, लेकिन वो इसे पूरा नहीं कर पाए. इसलिए उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत दोनों को दोषी मानते हुए दो साल की जेल की सजा सुनाई गई. अब दोनों बिल्डर दो सालों तक जेल की सलाखों के पीछे रहने वाले हैं.