केरल के इस्लामिक विद्वान की महिलाओं को लेकर टिप्पणी पर विवाद, राजनीतिक दलों ने जताई कड़ी आपत्ति
Kerala Islamic scholar's remarks on women spark controversy, political parties strongly object
केरल के इस्लामिक विद्वान कंठापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार की महिलाओं के सार्वजनिक जीवन में शामिल होने को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। CPI(M), कांग्रेस और BJP नेताओं ने बयान की आलोचना करते हुए इसे महिलाओं की समानता और स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है।
केरल में इस्लामिक विद्वान कंठापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार, जिन्हें शेख अबूबकर अहमद के नाम से भी जाना जाता है, की महिलाओं के सार्वजनिक जीवन में शामिल होने को लेकर की गई टिप्पणी के बाद राजनीतिक और सामाजिक विवाद तेज हो गया है। उन्होंने महिलाओं के घर तक सीमित रहने और सार्वजनिक मंचों पर आने से जुड़े विचार व्यक्त किए, जिसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनकी आलोचना की।
कोच्चि में सम्मेलन के दौरान दिया बयान
रिपोर्ट के अनुसार, 30 अगस्त को कोच्चि में आयोजित Hubbul Rasool Conference के दौरान कंठापुरम ने कहा कि महिलाओं को अपने घरों तक सीमित रहना चाहिए और उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं आना चाहिए। उन्होंने अपने विचारों के समर्थन में धार्मिक संदर्भों का उल्लेख किया और कहा कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
उन्होंने महिलाओं की तुलना एक सोने के हार से करते हुए कहा कि जिस तरह कीमती वस्तु को सुरक्षित रखा जाता है, उसी तरह महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए पर्दे और अलगाव की व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि Samastha के विद्वान लंबे समय से इस तरह के विचारों को प्रस्तुत करते रहे हैं।
Samastha के Circular के बाद बढ़ा विवाद
इन टिप्पणियों से कुछ दिन पहले Kanthapuram faction of Samastha Kerala Jamiyyathul Ulama की ओर से एक Circular जारी किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान महिलाओं को पुरुषों के साथ मंच साझा करने या सार्वजनिक स्थानों पर पुरुषों के साथ दिखाई देने से बचने की बात कही गई थी।
इसके बाद महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी, धार्मिक संस्थाओं की भूमिका और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर केरल में बहस तेज हो गई है।
CPI(M) और कांग्रेस नेताओं ने की आलोचना
कंठापुरम की टिप्पणी पर CPI(M) और कांग्रेस से जुड़े नेताओं तथा महिला नेताओं ने आपत्ति जताई। आलोचकों ने इन विचारों को महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी के अधिकार के खिलाफ बताया। केरल की Labour Minister Bindu Krishna ने कहा कि इस तरह के विचार महिलाओं को कई दशक पीछे ले जा सकते हैं और संवैधानिक समानता के अनुरूप नहीं हैं।
इस विवाद ने धार्मिक मान्यताओं और संविधान में दिए गए समानता तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है।
BJP ने भी साधा निशाना
Kerala BJP President Rajeev Chandrasekhar ने भी कंठापुरम की टिप्पणी और Samastha के Circular की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केरल की महिलाओं को शिक्षा, नेतृत्व, सार्वजनिक जीवन और अपने फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से दूर रखने की किसी भी कोशिश का विरोध करने की बात कही
BJP नेता Amit Malviya सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया और कांग्रेस तथा CPI(M) की प्रतिक्रिया पर सवाल किए। इसके बाद यह मामला केवल धार्मिक टिप्पणी तक सीमित न रहकर केरल की राजनीति में महिलाओं के अधिकार, धार्मिक संस्थाओं की भूमिका और संवैधानिक स्वतंत्रता से जुड़ी व्यापक बहस का विषय बन गया है।
फिलहाल कंठापुरम की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। विवाद के बीच महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी और उनके अधिकारों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पक्ष अपने विचार सामने रख रहे हैं।


