मुंबई : चीनी के बढ़ते दाम पर महाराष्ट्र सरकार का कदम, केंद्र को लिखा पत्र
Mumbai: Maharashtra government takes action on rising sugar prices, writes letter to Centre
चीनी की कीमतें बढ़ने से आमजनों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। साथ ही सियासी घमाशान भी मचने के आसार हैं। इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि खाने व कर्मशियल उपयोग के लिए चीनी की कीमतें अलग-अलग रखी जाएं। चीनी की बढ़ी कीमतों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। त्योहारों के मौसम में चीनी की बढ़ती कीमतों की वजह से आम ग्राहकों का घरेलू बजट लडखड़ा गया है। क्योंकि 50 रुपये प्रति किलो मिलने वाली चीनी सीधे 65 से 70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है।
मुंबई: चीनी की कीमतें बढ़ने से आमजनों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। साथ ही सियासी घमाशान भी मचने के आसार हैं। इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि खाने व कर्मशियल उपयोग के लिए चीनी की कीमतें अलग-अलग रखी जाएं। चीनी की बढ़ी कीमतों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। त्योहारों के मौसम में चीनी की बढ़ती कीमतों की वजह से आम ग्राहकों का घरेलू बजट लडखड़ा गया है। क्योंकि 50 रुपये प्रति किलो मिलने वाली चीनी सीधे 65 से 70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है।
सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि खाने के लिए चीनी का कोटा और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए चीनी का कोटा अलग-अलग होना चाहिए। खाने की चीनी की कीमतें कम होनी चाहिए। गन्ने की एफआरपी और चीनी के एमएसपी को जोड़ना होगा. तभी उत्पादक बचेंगे और गन्ना किसानों को कीमत मिलेगी।
सहकारिता मंत्री पाटिल के मुताबिक चाय और खाने के लिए 10 फीसदी चीनी इस्तेमाल होती है। जबकि बिस्कुट, कोल्ड ड्रिंक्स और दूसरे कमर्शियल कामों के लिए बड़ी मात्रा में चीनी की जरूरत होती है। इसलिए केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें मांग की गई है कि आम जनता को जितनी चीनी की आवश्यकता होती है, उसका कोटा अलग रखा जाए और उसकी कीमतें अलग रखी जाएं। केंद्र सरकार चीनी इंपोर्ट की योजना भी बना रही है, ताकि त्योहारी सीजन में लोगों को राहत मिल सके।


