मुंबई : मराठी सीखें या मुंबई छोड़ दें, ऑटोरिक्शा ड्राइवर्स को MNS की धमकी, कांदिवली में लगाए चेतावनी बोर्ड
Mumbai: Learn Marathi or leave Mumbai, MNS threatens autorickshaw drivers, puts up warning boards in Kandivali
महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता के बीच एक बार फिर मनसे का बयान आया है। इस बार महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मुंबई के कांदिवली इलाके में बोर्ड लगाए हैं। ये चेतावनी बोर्ड्स हैं, इनमें लिखा है कि भाषा के नियम को लेकर यात्रियों को परेशान किया गया या उन्हें मजबूर किया गया तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी।
मुंबई : महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता के बीच एक बार फिर मनसे का बयान आया है। इस बार महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मुंबई के कांदिवली इलाके में बोर्ड लगाए हैं। ये चेतावनी बोर्ड्स हैं, इनमें लिखा है कि भाषा के नियम को लेकर यात्रियों को परेशान किया गया या उन्हें मजबूर किया गया तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी। पार्टी के एक पदाधिकारी ने राज्य सरकार के इस नियम का समर्थन करते हुए कहा कि जिन ऑटो-रिक्शा चालकों को मराठी सीखने या बोलने में परेशानी है, वे महाराष्ट्र छोड़ सकते हैं।
राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे की यह टिप्पणी कांदिवली में चार ऑटो-रिक्शा चालकों द्वारा एक मराठी भाषी चालक के साथ कथित मारपीट के एक दिन बाद आई है। उस चालक ने भाषा संबंधी नियम के विरोध में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
कांदिवली में कई जगह लगे बोर्ड्स
कांदिवली की घटना के बाद स्थानीय स्तर पर मराठी भाषी लोगों और उत्तर भारत से आए चालकों के बीच तनाव पैदा हो गया। महानगर के चारकोप विधानसभा क्षेत्र मनसे के पदाधिकारी दिनेश सालवी ने कहा कि पार्टी ने कांदिवली में कई जगह बोर्ड लगाए हैं, जहां सोमवार को यह घटना हुई थी। सालवी ने कहा कि अगर ऑटो-रिक्शा चालकों को मराठी सीखने या बोलने में परेशानी है, तो वे महाराष्ट्र छोड़कर अपने-अपने राज्यों में वापस जा सकते हैं।
मराठी सिखा रहे ये संस्थान
महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से पूरे राज्य में अभियान शुरू किया है, जिसके तहत गैर-मराठी टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के मराठी भाषा के कामचलाऊ ज्ञान की जांच की जा रही है। कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ की ओर से चलाए गए 105 दिवसीय ‘हिंदूहृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान’ में 165601 गैर-मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक कामचलाऊ मराठी सीखने के लिए आगे आए। पिछले सप्ताह परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने के लिए व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान महाराष्ट्र में 1989 से जरूरी है, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था।


