महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में ग्रेड के आधार पर तय होगी अधिकारियों की जिम्मेदारी
Maharashtra government has decided that the responsibilities of the officers in the health department will be decided on the basis of grades.
महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब उनके काम की पहचान, मेरिट के आधार पर की जाएगी। उनके काम का हर साल लेखा-जोखा किया जाएगा और उसी आधार पर उनके साल के काम का ग्रेड तय करके उनकी प्राथमिकता के साथ जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह फैसला स्वास्थ्य विभाग ने लिया है। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर के अनुसार परफॉर्मेंस-बेस्ड एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क कल्चर बनाने के लिए यह अहम फैसला लिया गया है।
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब उनके काम की पहचान, मेरिट के आधार पर की जाएगी। उनके काम का हर साल लेखा-जोखा किया जाएगा और उसी आधार पर उनके साल के काम का ग्रेड तय करके उनकी प्राथमिकता के साथ जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह फैसला स्वास्थ्य विभाग ने लिया है। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर के अनुसार परफॉर्मेंस-बेस्ड एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क कल्चर बनाने के लिए यह अहम फैसला लिया गया है।
जिला सर्जन और जिला हेल्थ ऑफिसर कैडर के अधिकारियों का हर साल ऑब्जेक्टिव इवैल्यूएशन किया जाएगा। उनके ग्रेड पिछले तीन वर्षों की परफॉर्मेंस के आधार पर तय किए जाएंगे। इस ग्रेड का इस्तेमाल जिम्मेदारियां बांटने, अगले तीन वर्षों के लिए काम की योजना बनाने और भविष्य की नियुक्तियों के लिए किया जाएगा। इस निर्णय से सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठता के साथ-साथ असल परफॉर्मेंस, नेतृत्व कौशल, मरीजों की देखभाल, वित्तीय अनुशासन, मानव संशाधन प्रबंधन और योजनाओं को असरदार तरीके से लागू करने को अहमियत मिलेगी। बेहतरीन काम करने वाले अधिकारियों को उनकी काबिलियत के हिसाब से आगे मौके देने का सिस्टम बनाया जाएगा। इससे अधिकारियों का हौसला बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 31 मार्च 2026 को कम से कम तीन साल की सेवा पूरी करने वाले संबंधित अधिकारियों के काम की जानकारी अपडेट की जाएगी और उनकी रेटिंग की जाएगी। तीन साल 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान पोस्ट पर किए गए काम को देखते हुए कुल 100 अंक का मूल्यांकन किया जाएगा। इस रेटिंग के हिसाब से अधिकारियों को चार कैटेगरी ए बी सी और डी में बांटा जाएगा। यह प्रक्रिया हर साल लागू की जाएगी।
अधिकारियों की रेटिंग करते समय, सिर्फ पेपर वर्क को ही नहीं, बल्कि जिले के हेल्थ सिस्टम पर सीधे असर डालने वाले कई पहलुओं को शामिल किया गया है। लोगों से जुड़ाव, शिकायत निवारण, नेतृत्व गुणवत्ता, विशेष कौशल, प्रशिक्षण और कम्युनिकेशन स्किल पर विचार किया जाएगा। जिले की सालाना प्लानिंग, स्टेट अकाउंट्स, नेशनल हेल्थ मिशन और सीएसआर फंड के असरदार इस्तेमाल के लिए किए गए वित्तीय प्रबंधन की भी जांच की जाएगी। स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाए गए कदम, जैसे खाना, दवाइयां, साफ-सफाई और स्वास्थ्य प्रशिक्षण में ठेके पर रखे गए लोगों का सही इस्तेमाल, भी इवैल्यूएशन का हिस्सा होंगे।


