नई दिल्ली : कच्चा तेल हुआ 100 डॉलर के पार,पेट्रोल-डीजल बेचने पर कंपनियों को हो रहा भारी घाटा
New Delhi: Crude oil prices cross $100, companies incurring huge losses on selling petrol and diesel
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर भारत की तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। हालांकि देश में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर भारत की तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। हालांकि देश में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। मौजूदा कीमतों पर पेट्रोल और डीजल बेचने से कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है और यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो आगे ईंधन कीमतों को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
सितंबर में अब तक की स्थिति पर नजर डालें तो तेल कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 23 रुपये प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर भी करीब 200 रुपये की अंडर-रिकवरी बताई जा रही है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य लागत बढ़ने के बावजूद उपभोक्ताओं के लिए घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतें स्थिर रखे जाने से तेल कंपनियों को लागत और बिक्री मूल्य के बीच अंतर का भार उठाना पड़ रहा है।
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले तीन महीने से अधिक समय से स्थिर हैं। आखिरी बार 25 मई को दोनों ईंधनों की कीमतों में बदलाव किया गया था। उस समय पेट्रोल करीब 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल लगभग 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था। इससे पहले मई के दूसरे हिस्से में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण घरेलू ईंधन कीमतों में कई चरणों में बढ़ोतरी की गई थी।
मई के दौरान कुल चार बार हुई बढ़ोतरी में पेट्रोल की कीमत में करीब 7.35 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में लगभग 7.53 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी। इसके बाद से कीमतों को स्थिर रखा गया है। लेकिन अब एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार पहुंचने से तेल कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक तेल कीमतों में होने वाला बदलाव देश की अर्थव्यवस्था और तेल कंपनियों की लागत पर सीधे असर डालता है। अगर पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ता है तथा कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत के लिए आयात बिल बढ़ने, रुपये पर दबाव आने और तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी बढ़ने का जोखिम रहेगा। फिलहाल उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल राहत या बढ़ोतरी के बजाय स्थिर दरों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति आने वाले दिनों में बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।


