मुंबई : अब अस्पतालों की मनमानी पर चलेगा तुकाराम मुंढे का 'चाबुक'... 11 रुपए की IV ड्रिप का मरीज से वसूल रहे 325 रुपए

Mumbai: Tukaram Mundhe to crack the whip on hospitals' arbitrary practices... charging patients ₹325 for an IV drip costing ₹11.

मुंबई : अब अस्पतालों की मनमानी पर चलेगा तुकाराम मुंढे का 'चाबुक'... 11 रुपए की IV ड्रिप का मरीज से वसूल रहे 325 रुपए

एफडीए के इस मार्केट सर्वे में अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल वस्तुओं की खरीद और बिक्री कीमत में अंतर का अध्ययन किया गया। इसमें अस्पतालों की खरीद कीमत और मरीजों से वसूले गए प्रिंटेड एमआरपी (MRP) का अंतर बहुत अधिक होने का खुलासा हुआ। इसके अनुसार, IV इंफ्यूजन सेट जो निजी अस्पतालों ने मात्र 11.05 रुपए में खरीदा, लेकिन मरीजों के बिल में इसके 325 रुपए वसूले गए।


मुंबई : तुकाराम मुंढे की अगुवाई में FDA ने निजी अस्पतालों द्वारा सर्जिकल सामानों और मेडिकल उपकरणों की खरीद दर पर भारी-भरकम मुनाफा वसूलने का खुलासा किया है। राज्य एफडीए द्वारा कराए गए एक सर्वे में सामने आया है कि निजी अस्पताल सर्जिकल सामानों पर खरीद मूल्य से 2,841 प्रतिशत तक मुनाफा वसूल रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने 10 अगस्त को केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने और सख्त नियम बनाने की सिफारिश की है।

रिपोर्ट के अनुसार, एफडीए के इस मार्केट सर्वे में अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल वस्तुओं की खरीद और बिक्री कीमत में अंतर का अध्ययन किया गया। इसमें अस्पतालों की खरीद कीमत और मरीजों से वसूले गए प्रिंटेड एमआरपी (MRP) का अंतर बहुत अधिक होने का खुलासा हुआ। इसके अनुसार, IV इंफ्यूजन सेट जो निजी अस्पतालों ने मात्र 11.05 रुपए में खरीदा, लेकिन मरीजों के बिल में इसके 325 रुपए वसूले गए।

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यह सिर्फ कीमत नहीं, मरीजों की सुरक्षा का मुद्दा
एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने इस विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा, यह केवल कीमतों या मुनाफे से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर मरीजों के अधिकारों और सुरक्षा का मामला है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीज और उनके परिजन अक्सर इस स्थिति में नहीं होते कि वे यह पता लगा सकें कि किसी मेडिकल उत्पाद के लिए उनसे ली जा रही कीमत उचित है या नहीं। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मुंढे ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इन जरूरी मेडिकल उपकरणों के ट्रेड मार्जिन पर एक सीमा तय की जाए और उन्हें प्राइस मॉनिटरिंग के तहत लाया जाए।
जरूरी मेडिकल सामान पर ट्रेड मार्जिन तय करने का प्रस्ताव
FDA की ओर से केंद्र के सामने मेडिकल उपकरणों की कीमतों में पारदर्शिता लाने के लिए कई प्रस्ताव रखे गए हैं। इनमें जरूरी मेडिकल डिवाइस की कुछ श्रेणियों पर ट्रेड मार्जिन की सीमा तय करना और आवश्यक उपकरणों को एक व्यवस्थित प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत लाने का सुझाव शामिल है। तुकाराम मुंढे ने कीमतों के अंतर को तर्कसंगत बनाने, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच संयुक्त समीक्षा करने और मेडिकल डिवाइसेज की खरीद लागत तथा घोषित एमआरपी के बीच अंतर को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की जरूरत बताई है।

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