सऊदी की तेल पाइपलाइन ड्रोन हमले से किस कदर हुई तबाह ...
The extent of the devastation caused to the Saudi oil pipeline by the drone attack...
सऊदी अरब ने पाइपलाइन पर हुए हमले के लिए इराक से संचालित ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ड्रोन हमला इराक से शुरू होने की बात सामने आई है, जबकि इराक ने इसकी जांच शुरू की है. कुछ मिलिशिया समूहों ने हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब यमन में हूती समूह ने भी सऊदी अरब के खिलाफ अपने हमले तेज किए हैं. हूती समूह पर ईरान का समर्थन प्राप्त होने का आरोप है. हाल के हमलों के बाद क्षेत्र में तेल उत्पादन, पाइपलाइन और समुद्री परिवहन से जुड़ी सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद सामने आई नई सैटेलाइट तस्वीरों ने नुकसान की गंभीरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है. तस्वीरों में पाइपलाइन के एक प्रमुख पंपिंग स्टेशन के आसपास बड़े पैमाने पर जले हुए हिस्से और ढांचागत नुकसान दिखाई दे रहा है. एक्सपर्ट का अनुमान है कि पाइपलाइन को पूरी क्षमता से दोबारा चलाने में कई सप्ताह लग सकते हैं. यह पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है और सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल को लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है. इसका महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इसके जरिए सऊदी अरब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास करके तेल को दूसरे रास्ते से निर्यात कर सकता है.
सैटेलाइट तस्वीरों में हमले के बाद पाइपलाइन से जुड़े पंपिंग स्टेशन के आसपास बड़े जले हुए हिस्से दिखाई दे रहे हैं. पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना करने पर इस क्षेत्र में आग और ढांचागत नुकसान साफ नजर आता है. सैटेलाइट एनालिसिसमें 10 सितंबर के आसपास इस इलाके में धुएं और गर्मी से जुड़ी असामान्य गतिविधियां भी दर्ज की गई थीं. रिपोर्टों के अनुसार, नुकसान के कारण सऊदी अरब ने पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया. इसके चलते यानबू के रास्ते होने वाले तेल निर्यात पर भी असर पड़ा है. रॉयटर्स के अनुसार, सऊदी अरब ने यूरोप के लिए कुछ तेल शिपमेंट भी रोक दिए हैं और यानबू बंदरगाह से सितंबर के कुछ कार्गो लोडिंग प्रभावित हुई हैं.
पाइपलाइन की मरम्मत में कितना समय लगेगा, इस पर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं. कुछ जानकारों ने इसे कुछ सप्ताह का काम बताया है, जबकि अन्य अनुमानों में पांच से छह सप्ताह तक का समय बताया गया है. केप्लर के एक्सपर्ट होमायूं फलकशाही के अनुसार, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और सप्लाई चेन में रुकावट को देखते हुए मरम्मत में 4 से 6सप्ताह लग सकते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इतने पूरे समय तक पाइपलाइन में तेल का प्रवाह पूरी तरह बंद ही रहेगी. कुछ रिपोर्टों में आंशिक संचालन पहले शुरू होने की संभावना भी बताई गई है. इसलिए वास्तविक नुकसान और बहाली का समय अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता बहुत बड़ी है. अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, इसके जरिए करीब 4 से 5 मिलियन बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन भेजा जा सकता है. यह मात्रा दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 4 फीसदी है. इसलिए लंबे समय तक पाइपलाइन बंद रहने पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दबाव बढ़ सकता है. पाइपलाइन बंद होने की खबरों के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई. हालांकि 16 सितंबर को अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार बढ़ने की खबर के बाद कीमतों में कुछ नरमी भी देखी गई और ब्रेंट करीब 107.82 डॉलर प्रति बैरल पर आया.
सऊदी अरब ने पाइपलाइन पर हुए हमले के लिए इराक से संचालित ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ड्रोन हमला इराक से शुरू होने की बात सामने आई है, जबकि इराक ने इसकी जांच शुरू की है. कुछ मिलिशिया समूहों ने हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब यमन में हूती समूह ने भी सऊदी अरब के खिलाफ अपने हमले तेज किए हैं. हूती समूह पर ईरान का समर्थन प्राप्त होने का आरोप है. हाल के हमलों के बाद क्षेत्र में तेल उत्पादन, पाइपलाइन और समुद्री परिवहन से जुड़ी सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.
सऊदी अरब के खमीस मुशैत के पास स्थित किंग खालिद एयर बेस को भी हाल के हूती हमलों में नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट है. सैटेलाइट तस्वीरों में एयर बेस के कम से कम तीन एयरक्राफ्ट हैंगर या शेल्टर क्षतिग्रस्त दिखाई देने की बात सामने आई है. इस बेस पर अमेरिका में बने F-15 लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं. सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा है कि हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों में 13 लोग घायल हुए. दूसरी ओर, हूती समूह ने दावा किया है कि उसने सऊदी सैन्य ठिकानों और अन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में उपलब्ध नहीं है.
तेल पाइपलाइन पर हमले के साथ ही लाल सागर क्षेत्र में हूती गतिविधियां भी बढ़ी हैं. रिपोर्टों के अनुसार, हूती लड़ाकों ने बाब अल-मंदाब के आसपास रणनीतिक इलाकों पर अपना कंट्रोल बढ़ाया है. यह जलमार्ग वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे में सऊदी अरब के सामने एक साथ दो तरह की चुनौती दिखाई दे रही है. एक तरफ स्ट्रेट ऑफ के रास्ते तेल परिवहन में पहले से परेशानी है, वहीं दूसरी तरफ उसे बायपास करने वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और लाल सागर मार्ग भी सुरक्षा जोखिमों से घिर गए हैं.
अगर पाइपलाइन की मरम्मत में लंबा समय लगता है और यानबू के तेल भंडार कम होते हैं तो सऊदी अरब को अपने ग्राहकों को तेल पहुंचाने के लिए दूसरे रास्तों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ सकता है. इससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई को लेकर चिंता बनी रह सकती है. हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाइपलाइन बंद रहने से तेल की कीमतें कितनी बढ़ेंगी. इसकी वास्तविक अवधि, सऊदी अरब के वैकल्पिक निर्यात इंतजाम और होर्मुज व लाल सागर में आगे की स्थिति पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी.


