महाराष्ट्र में सूखे पर भड़की सियासत... शिंदे गुट का उद्धव ठाकरे पर तंज !
Politics heats up over drought in Maharashtra... Shinde faction takes a dig at Uddhav Thackeray!
शिवसेना शिंदे गुट के सोशल मीडिया वाइस प्रेसिडेंट प्रतीक शर्मा ने अपने पोस्ट में एक कार्टून को आधार बनाते हुए लिखा, "सूखा सर्वे: फ़ोन पर चल रहा है 'संडे मोर्चा'' इस तंज के जरिए उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब राज्य के किसान और ग्रामीण इलाके भीषण सूखे और जल संकट से जूझ रहे हैं। तब विपक्षी नेता ज़मीनी स्तर पर जाने के बजाय केवल फोन और सोशल मीडिया तक सीमित हैं। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने राज्य सरकार से किसानों की दुर्दशा को देखते हुए तुरंत राहत कदम उठाने और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए ठोस नीतियाँ लागू करने की मांग की है।
महाराष्ट्र : महाराष्ट्र में गंभीर होते सूखे जैसे हालातों के बीच सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेजी से शुरू हो गया है। इस पूरे मामले में विवाद तब और बढ़ गया जब शिवसेना शिंदे गुट के सोशल मीडिया वाइस प्रेसिडेंट प्रतीक शर्मा ने शिवसेना, उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी के प्रमुख उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना। प्रतीक शर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक व्यंग्यात्मक कार्टून शेयर करते हुए उद्धव ठाकरे की कार्यशैली और भूमिका का मजाक उड़ाया और उन पर तीखी आलोचनात्मक टिप्पणी की।
शिवसेना शिंदे गुट के सोशल मीडिया वाइस प्रेसिडेंट प्रतीक शर्मा ने अपने पोस्ट में एक कार्टून को आधार बनाते हुए लिखा, "सूखा सर्वे: फ़ोन पर चल रहा है 'संडे मोर्चा'' इस तंज के जरिए उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब राज्य के किसान और ग्रामीण इलाके भीषण सूखे और जल संकट से जूझ रहे हैं। तब विपक्षी नेता ज़मीनी स्तर पर जाने के बजाय केवल फोन और सोशल मीडिया तक सीमित हैं। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने राज्य सरकार से किसानों की दुर्दशा को देखते हुए तुरंत राहत कदम उठाने और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए ठोस नीतियाँ लागू करने की मांग की है।
शिवसेना शिंदे गुट के सोशल मीडिया वाइस प्रेसिडेंट प्रतीक शर्मा की इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए हैं। महाराष्ट्र राज्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के मुद्दे बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। एक तरफ जहां विपक्ष सरकार की तैयारियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल विपक्ष की संवेदनशीलता पर निशाना साध रहा है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में सूखे का यह मुद्दा केवल प्रशासनिक राहत तक सीमित न रहकर और अधिक उग्र राजनीतिक रूप ले सकता है।


