महाराष्ट्र : धार्मिक जुलूसों के शोर पर बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्त... पटाखों से लेकर डीजे तक पर उठाए सवाल ?
Maharashtra: Bombay High Court takes a tough stance on the noise from religious processions... raises questions about everything from firecrackers to DJs.
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने इस मामले में 21 सितंबर को स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कौन-कौन से कानून लागू हैं. इसके साथ ही सरकार ने यह भी पूछा कि इन कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है.
महाराष्ट्र : गणेश उत्सव और अन्य धार्मिक जुलूसों के दौरान बढ़ते ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर पूर्ण रोक लगाने की बात कही. कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि तय सीमा से अधिक शोर पैदा करने वाले पटाखों और धार्मिक जुलूसों में ढोल-ताशा पथकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सिलेंडर नुमा वाद्य उपकरणों पर भी रोक संबंधी विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा.
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने इस मामले में 21 सितंबर को स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कौन-कौन से कानून लागू हैं. इसके साथ ही सरकार ने यह भी पूछा कि इन कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है.
हाई कोर्ट ने कहा कि धार्मिक उत्सव और जुलूस आयोजित करने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इनका आयोजन इस तरह होना चाहिए कि दूसरे नागरिकों के अधिकार प्रभावित न हों. कोर्ट ने विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, छात्रों और बीमार लोगों पर अत्यधिक शोर के असर को गंभीरता से लिया. हाई कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि जब सामान्य तौर पर लाउड स्पीकर, एम्प्लीफायर और संगीत वाद्य यंत्रों के इस्तेमाल की अनुमति रात 10 बजे तक होती है, तो धार्मिक जुलूसों में तेज आवाज वाले संगीत को आधी रात तक चलाने की अनुमति कैसे दी जा रही है.
‘भगवान से आशीर्वाद के लिए लाउडस्पीकर जरूरी हैं?’
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि क्या लाउडस्पीकर और पटाखों के इस्तेमाल से भगवान से अतिरिक्त आशीर्वाद मिलने वाला है. कोर्ट ने पंढरपुर की वारी का उदाहरण देते हुए कहा कि यह यात्रा बिना लाउडस्पीकर और अत्यधिक शोर के भी शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित होती है. कोर्ट ने कहा कि क्या भगवान से अतिरिक्त आशीर्वाद के लिए लाउडस्पीकर और पटाखे जरूरी हैं?.
नियम हैं तो अमल क्यों नहीं?
महाराष्ट्र के महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने हाई कोर्ट को बताया कि मुंबई पुलिस ने गणेशोत्सव के दौरान कई प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं. इसके बाद हाई कोर्ट ने सवाल किया कि इन आदेशों का जमीन पर कितना पालन हो रहा है. कोर्ट ने कहा कि नियम हैं तो उन पर अमल क्यों नहीं हो रहा है. कोर्ट ने मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल कागजों पर आदेश होना पर्याप्त नहीं है और यदि उनका उल्लंघन हो रहा है तो संबंधित अधिकारियों को प्रभावी कार्रवाई करनी होगी. हाई कोर्ट नेने धार्मिक जुलूसों में डीजे, लाउडस्पीकर, म्यूजिकल सिस्टम और लेजर बीम के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं. ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करने वाले उपकरणों को जब्त करने और संबंधित मामलों में कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता पर भी सुनवाई के दौरान जोर दिया गया.
कोर्ट के प्रमुख सवाल
धार्मिक जुलूसों में ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए मौजूदा कानूनों का पालन क्यों नहीं हो रहा?
रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर और तेज आवाज वाले संगीत की अनुमति कैसे दी जा रही है?
सार्वजनिक सड़कों पर पटाखों से होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण को कैसे रोका जाए?
नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजे और साउंड सिस्टम के खिलाफ क्या कार्रवाई हो रही है?
जुलूसों में इस्तेमाल होने वाले अत्यधिक शोर पैदा करने वाले उपकरणों पर नियंत्रण कैसे किया जाए?
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से इन सभी मुद्दों पर उठाए गए और प्रस्तावित कदमों की जानकारी मांगी है. मामले में विस्तृत आदेश के जरिए आगे के निर्देश स्पष्ट होने की उम्मीद है.


