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Read More... ठाणे डीमार्ट में एक्सपायर्ड केक बेचने का आरोप, उपभोक्ता सुरक्षा पर उठ रहा सवाल
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By Online Desk
ठाणे पश्चिम स्थित धोकाली इलाके में एक डीमार्ट आउटलेट से कथित तौर पर एक्सपायर्ड केक बेचने जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने उपभोक्ता सुरक्षा और खासकर बच्चों के खाद्य उत्पादों की क्वालिटी को लेकर गंभीर चिंताएँ खड़ी कर दी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में आरोप लगाया गया है कि दुकान में “ब्रिटानिया गोबल्स फ्रूटी फन बार केक” जैसे प्रोडक्ट, जिनकी एक्सपायरी डेट 19 अप्रैल थी, उन्हें 2 मई तक भी बिक्री के लिए शेल्फ पर रखा गया था। वीडियो में यह भी दिखाया गया है कि केवल एक ही नहीं बल्कि केक का पूरा बैच एक्सपायर्ड स्थिति में था। भिवंडी के 51 स्कूलों में सीसीटीवी लगाने की तैयारी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
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By Online Desk
भिवंडी-निज़ामपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के बिजली विभाग ने शहर के 51 स्कूल भवनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए लगभग 75 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को मंजूरी और फंडिंग के लिए जिला योजना समिति को भेजा गया है। हालांकि, स्कूलों में सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। मुर्शिदाबाद : मीर जाफर के वंशजों की अनदेखी?: SIR में 346 लोगों के नाम कटे, प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल
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By Online Desk
मुर्शिदाबाद में चुनाव आयोग ने मीर जाफर के वंश से जुड़े करीब 346 लोगों के नाम वोटर सूची से हटा दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद अब इस पूर्व शाही परिवार के सदस्यों पर अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से सामने आया एक मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। बंगाल के पूर्व नवाब मीर जाफर के वंशजों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। मुंबई : महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल पर सवाल, वालधुनी नदी सफाई के लिए न फंड, न योजना
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By Online Desk
वालधुनी नदी की स्थिति को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) के कल्याण उप-प्रादेशिक कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में नदी से जुड़ी गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। वालधुनी नदी स्वच्छता सेवाभावी संस्था के अध्यक्ष सुनील उतेकर द्वारा पिछले 5 वर्षों की जानकारी मांगे जाने पर पता चला कि इस अवधि में नदी के मुद्दे पर सामाजिक और राजनीतिक जनप्रतिनिधियों द्वारा बेहद कम पत्राचार किया गया। 
