बांग्लादेश : महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल... भारत के पड़ोसी मु्ल्क में 7 महीने में 3 बार बढ़े दाम

Bangladesh: Petrol and diesel prices hiked... Prices raised three times in seven months in India's neighboring country.

बांग्लादेश : महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल... भारत के पड़ोसी मु्ल्क में 7 महीने में 3 बार बढ़े दाम

बांग्लादेश के सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग ने भी ईंधन की कीमत बढ़ने के लंबे समय तक रहने वाले असर को लेकर चिंता जताई है. थिंक टैंक के अनुसार इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और निम्न-मध्यम आय वाले परिवारों पर पड़ सकता है. ईंधन महंगा होने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता. परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने पर खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की दूसरी चीजों की कीमतों पर भी दबाव आ सकता है.

बांग्लादेश : बांग्लादेश में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी की गई है. सरकार ने डीजल, पेट्रोल, ऑक्टेन और केरोसिन के दाम में 20 टका प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. नई कीमतें सोमवार से लागू हो गई हैं. यह पिछले सात महीनों में ईंधन की कीमतों में तीसरी बढ़ोतरी है. सरकार के इस फैसले के बाद फरवरी के मुकाबले बांग्लादेश में ईंधन की खुदरा कीमतों में करीब 38.4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है. ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ने और क्षेत्र में अस्थिरता के कारण माल ढुलाई का खर्च बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा.

नई दर लागू होने के बाद बांग्लादेश में डीजल की कीमत 115 टका से बढ़कर 135 टका प्रति लीटर हो गई है. यानी इसमें करीब 17.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. पेट्रोल का भाव 140 टका से बढ़कर 160 टका प्रति लीटर हो गया है. ऑक्टेन की कीमत 145 टका से बढ़कर 165 टका और केरोसिन का दाम 135 टका से बढ़कर 155 टका प्रति लीटर हो गया है. सरकार ने इससे पहले अप्रैल और जून में भी ईंधन के दाम बढ़ाए थे. इस तरह फरवरी में हुए चुनाव के बाद यह तीसरी बढ़ोतरी है.
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों का दिया हवाला
बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार मार्च के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में फ्यूल की कीमतें दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गई हैं. इसके अलावा क्षेत्रीय तनाव और अस्थिरता के कारण ईंधन को दूसरे देशों से लाने का खर्च भी बढ़ा है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के नेताओं ने भी सरकार के फैसले का बचाव किया है. पार्टी के कार्यवाहक महासचिव और प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार रूहूल कबीर रिजवी ने कहा कि बढ़ी कीमतों के बाद भी सरकार को डीजल पर प्रति लीटर करीब 70 टका का नुकसान उठाना पड़ेगा.

ईंधन महंगा होने के बाद बांग्लादेश में ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ाने की मांग भी शुरू हो गई है. लंबी दूरी के कुछ रूट पर ट्रांसपोर्ट मालिकों ने किराया 100 टका तक बढ़ाने की बात कही है. ढाका के भीतर भी कुछ रूट पर यात्रियों से ज्यादा किराया लिए जाने की शिकायतें सामने आने लगी हैं. ईंधन की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई और कंटेनर परिवहन का खर्च भी बढ़ने की आशंका है. चट्टोग्राम बंदरगाह के आसपास काम करने वाले लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों ने भी अपनी सेवाओं की कीमतों में बदलाव की मांग शुरू कर दी है. इससे आयात और निर्यात से जुड़ी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है.

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में गारमेंट उद्योग की बड़ी भूमिका है. कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से पहले से दबाव झेल रहे उद्योगों की लागत और बढ़ सकती है. बांग्लादेश में उद्योगों को पहले से गैस और बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में डीजल और दूसरे ईंधन महंगे होने से उत्पादन, परिवहन और सामान की सप्लाई का खर्च बढ़ सकता है. बांग्लादेश चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष अनवर-उल आलम चौधरी परवेज ने कहा कि सरकार ने ऐसे समय में ईंधन की कीमत बढ़ाई है जब देश में महंगाई पहले से ऊंचे स्तर पर है. उनके अनुसार इससे कारोबार और रोजगार पर दबाव बढ़ सकता है.

बांग्लादेश के सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग ने भी ईंधन की कीमत बढ़ने के लंबे समय तक रहने वाले असर को लेकर चिंता जताई है. थिंक टैंक के अनुसार इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और निम्न-मध्यम आय वाले परिवारों पर पड़ सकता है. ईंधन महंगा होने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता. परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने पर खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की दूसरी चीजों की कीमतों पर भी दबाव आ सकता है.

डीजल की बढ़ी कीमत का असर बांग्लादेश के कृषि क्षेत्र पर भी पड़ने की आशंका है. कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार देश के करीब 70 प्रतिशत सिंचाई पंप डीजल से चलते हैं. ऐसे में डीजल महंगा होने पर किसानों की सिंचाई लागत बढ़ सकती है. इसका असर खेती की कुल लागत और आगे चलकर कृषि उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है.