आईआईटी बॉम्बे विवाद: डायरेक्टर ने नहीं दिया इस्तीफा, प्रो. डूला सस्पेंड नहीं
IIT Bombay controversy: Director has not resigned; Prof. Doola not suspended.
आईआईटी बॉम्बे ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि डायरेक्टर द्वारा पद छोड़ने या इस्तीफा देने की खबर में कोई सच्चाई नहीं है. संस्थान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “IIT बॉम्बे के डायरेक्टर ने इस्तीफा नहीं दिया है. हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि इससे जुड़ी खबरें पूरी तरह से असत्य और निराधार हैं.” वहीं, प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के संबंध में भी आईआईटी बॉम्बे ने स्थिति स्पष्ट की है.
आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की दुखद मौत के बाद जारी घटनाक्रम के बीच संस्थान प्रशासन ने सोशल मीडिया और मीडिया में चल रही कुछ खबरों पर आधिकारिक रूप से स्थिति साफ की है. IIT बॉम्बे ने एक विशेष संदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि संस्थान के डायरेक्टर के इस्तीफे और प्रोफेसर के निलंबन को लेकर फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह भ्रामक और गलत हैं.
आईआईटी बॉम्बे ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि डायरेक्टर द्वारा पद छोड़ने या इस्तीफा देने की खबर में कोई सच्चाई नहीं है. संस्थान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “IIT बॉम्बे के डायरेक्टर ने इस्तीफा नहीं दिया है. हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि इससे जुड़ी खबरें पूरी तरह से असत्य और निराधार हैं.” वहीं, प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के संबंध में भी आईआईटी बॉम्बे ने स्थिति स्पष्ट की है. संस्थान ने बताया कि प्रो. डूला को निलंबित नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें उनके प्रशासनिक जिम्मेदारी वाले डीन पद से हटा दिया गया है. संस्थान के अनुसार- प्रो. डूला वर्तमान में डीन (एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स) के पद पर कार्यरत थे, जिससे उन्हें मुक्त कर दिया गया है.
इसी के साथ पिछले तीन दिनों से जारी छात्रों का उग्र प्रदर्शन एक बड़े ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गया है. प्रदर्शनकारी छात्रों के भारी दबाव के बीच IIT बॉम्बे प्रशासन ने छात्रों के 18 सूत्रीय मांग पत्र पर पूरी तरह सहमति जताई है. छात्रों के साथ हुई लंबी मैराथन बैठक के बाद IIT बॉम्बे के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष केदारे ने इस 18 सूत्रीय चार्टर पर हस्ताक्षर किए. छात्रों के 18 सूत्रीय मांग पत्र में साहिल वाकोडे की मौत की निष्पक्ष जांच से लेकर प्रशासनिक बदलावों तक कई अहम बिंदु शामिल हैं.
स्वतंत्र जांच कमेटी का गठन: साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी बनाई जाए, जिसमें प्रोफेसर, छात्र प्रतिनिधि और बाहरी निष्पक्ष सदस्य शामिल हों.
समयबद्ध रिपोर्ट सार्वजनिक करना: जांच की अंतरिम रिपोर्ट 30 सितंबर 2026 तक और अंतिम रिपोर्ट 15 अक्टूबर 2026 तक प्रक्रिया व निष्कर्षों के साथ सार्वजनिक की जाए.
प्रोफेसर पर निलंबन की कार्रवाई: परीक्षा निरीक्षक प्रो. सूर्यनारायण डूला के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई और निलंबन (जिस पर अमल करते हुए प्रशासन ने प्रो. डूला को उनके डीन के पद से हटाया है).
संस्थान द्वारा सार्वजनिक माफी: साहिल की मौत के तुरंत बाद बिना जांच पूरे हुए जल्दबाजी में जारी किए गए आधिकारिक बयान पर संस्थान सार्वजनिक माफी मांगे (प्रशासन ने इस पर भी अमल करते हुए माफी जारी कर दी है).
ओपन हाउस का आयोजन: डायरेक्टर, डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स (DoSA) और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में छात्रों के साथ सीधी बातचीत के लिए ओपन हाउस आयोजित किया जाए.
छात्र कल्याण व जवाबदेही में सुधार: कैंपस में मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम को पारदर्शी बनाना, प्रशासनिक अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करना और छात्र मानसिक प्रताड़ना रोकने के लिए एसओपी (SOP) तैयार करना.
18 सूत्रीय चार्टर पर हस्ताक्षर के साथ ही IIT बॉम्बे ने दो बड़े कदमों पर अमल कर दिया है. एनर्जी साइंस विभाग के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को उनके डीन के पद से हटा दिया गया. वहीं, संस्थान ने अपने पहले दिए गए बयान के लिए औपचारिक माफी मांगते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले घटना का विवरण किसी विशेष रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं था. निष्पक्ष तथ्य पुलिस और क्राइम ब्रांच की जांच के बाद ही सामने आएंगे.
18 सितंबर को साहिल वाकोडे की मौत के बाद उसके परिजनों की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने BNS की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. मामले की जांच अब मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है. पुलिस ने साहिल का मोबाइल जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है. दूसरी ओर, आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रो. डूला का समर्थन करते हुए कहा है कि उन्होंने केवल परीक्षा नियमों का पालन किया था.


