मुंबई : सात झीलों में कम हुआ पानी का स्तर... कुल स्टॉक गिरकर 97.14% पर पहुंचा

Mumbai: Water levels in the seven lakes have dropped... total stock has fallen to 97.14%.

मुंबई : सात झीलों में कम हुआ पानी का स्तर... कुल स्टॉक गिरकर 97.14% पर पहुंचा

रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पिछले 24 घंटों के दौरान किसी भी जलाशय के कैचमेंट एरिया में बारिश दर्ज नहीं की गई। इसका सीधा असर जलाशयों में उपलब्ध पानी के स्तर पर दिखाई दिया। एक दिन पहले की तुलना में कुल स्टॉक में मामूली कमी दर्ज की गई। मुंबई जैसे बड़े महानगर के लिए जलाशयों में उपलब्ध पानी का स्तर बेहद महत्वपूर्ण होता है। शहर की बड़ी आबादी की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इन जलाशयों से नियमित रूप से पानी लिया जाता है। यही कारण है कि मानसून के दौरान जलाशयों में जमा होने वाले पानी पर पूरे वर्ष नजर रखी जाती है।

मुंबई। मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले सात जलाशयों में पानी का स्टॉक लगातार कम हो रहा है। रविवार को इन जलाशयों में कुल उपयोगी पानी का स्तर 97.14 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि शनिवार को यह 97.37 प्रतिशत था। पिछले 24 घंटों के दौरान सातों जलाशयों के कैचमेंट एरिया में बारिश दर्ज नहीं होने के कारण पानी के स्टॉक में मामूली गिरावट आई है।

27 सितंबर को भांडुप कॉम्प्लेक्स स्थित मास्टर कंट्रोल सेंटर से हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाले सात जलाशयों में कुल 1,405,980 मिलियन लीटर उपयोगी लाइव स्टोरेज उपलब्ध था। इन सभी जलाशयों की कुल क्षमता 1,447,363 मिलियन लीटर बताई गई है।

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आंकड़ों के अनुसार एक दिन में पानी के स्टॉक में 0.23 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। शनिवार को सातों जलाशयों का संयुक्त स्टॉक 97.37 प्रतिशत था, जो रविवार को घटकर 97.14 प्रतिशत पर आ गया। हालांकि जलाशयों में अभी भी उनकी कुल क्षमता का बड़ा हिस्सा उपलब्ध है। मुंबई में पानी की आपूर्ति मुख्य रूप से सात प्रमुख जलाशयों से की जाती है। मानसून के दौरान इन जलाशयों के कैचमेंट क्षेत्रों में होने वाली बारिश से पानी का स्तर बढ़ता है। बारिश का दौर कमजोर होने या पूरी तरह रुकने के बाद जलाशयों में आने वाले पानी की मात्रा कम हो जाती है, जबकि शहर के लिए नियमित जलापूर्ति जारी रहने के कारण स्टॉक धीरे-धीरे घटने लगता है।

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रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पिछले 24 घंटों के दौरान किसी भी जलाशय के कैचमेंट एरिया में बारिश दर्ज नहीं की गई। इसका सीधा असर जलाशयों में उपलब्ध पानी के स्तर पर दिखाई दिया। एक दिन पहले की तुलना में कुल स्टॉक में मामूली कमी दर्ज की गई। मुंबई जैसे बड़े महानगर के लिए जलाशयों में उपलब्ध पानी का स्तर बेहद महत्वपूर्ण होता है। शहर की बड़ी आबादी की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इन जलाशयों से नियमित रूप से पानी लिया जाता है। यही कारण है कि मानसून के दौरान जलाशयों में जमा होने वाले पानी पर पूरे वर्ष नजर रखी जाती है।

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भांडुप कॉम्प्लेक्स स्थित मास्टर कंट्रोल सेंटर के जरिए जलाशयों में उपलब्ध पानी की नियमित निगरानी की जाती है। हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग पानी के स्टॉक, बारिश और जलाशयों के स्तर से संबंधित आंकड़े जारी करता है। इससे शहर में उपलब्ध जल भंडार की स्थिति का आकलन किया जाता है। 27 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक सातों झीलों में कुल 1,405,980 मिलियन लीटर उपयोगी पानी उपलब्ध था। कुल क्षमता 1,447,363 मिलियन लीटर होने के मुकाबले यह 97.14 प्रतिशत है। यानी जलाशयों में फिलहाल अधिकांश क्षमता के बराबर पानी मौजूद है, लेकिन बारिश नहीं होने की स्थिति में इसमें धीरे-धीरे कमी आ सकती है। 

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शनिवार को यही स्टॉक 97.37 प्रतिशत दर्ज किया गया था। रविवार तक इसमें 0.23 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज हुई। यह गिरावट फिलहाल सीमित है, लेकिन आने वाले दिनों में कैचमेंट क्षेत्रों में बारिश की स्थिति जल स्तर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी। मानसून के दौरान मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में होने वाली बारिश का सीधा फायदा इन जलाशयों को मिलता है। विशेष रूप से जलाशयों के कैचमेंट क्षेत्र में अच्छी बारिश होने पर पानी तेजी से जमा होता है। इसके विपरीत यदि शहर में बारिश हो लेकिन जलाशयों के कैचमेंट क्षेत्रों में बारिश न हो तो उसका जल भंडार पर अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ता। इसी वजह से जलाशयों की स्थिति का आकलन केवल मुंबई शहर में होने वाली बारिश से नहीं किया जाता। संबंधित विभाग प्रत्येक जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में दर्ज वर्षा और उपलब्ध लाइव स्टोरेज पर नजर रखता है। फिलहाल सातों जलाशयों में 97 प्रतिशत से अधिक उपयोगी पानी मौजूद होने के कारण जल भंडार की स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि दैनिक आपूर्ति के साथ पानी का स्तर स्वाभाविक रूप से कम होता रहेगा। आगे बारिश होती है तो जलाशयों में पानी की आवक फिर बढ़ सकती है। मुंबई में हर वर्ष मानसून के दौरान जलाशयों के भरने की स्थिति पर विशेष नजर रहती है।

गर्मी के महीनों में पानी की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए मानसून में पर्याप्त जल भंडारण महत्वपूर्ण होता है। जलाशयों में जितना अधिक पानी जमा होता है, अगले मानसून तक जलापूर्ति बनाए रखने में उतनी ही सुविधा होती है। रविवार के आंकड़ों में पानी का स्टॉक 97.14 प्रतिशत होने के बावजूद एक दिन में हुई गिरावट इस बात को दिखाती है कि बारिश रुकने के बाद जलाशयों का स्तर धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है। फिलहाल यह कमी सामान्य दैनिक जल उपयोग के अनुरूप दिखाई दे रही है। पिछले 24 घंटों में बारिश नहीं होने से जलाशयों में अतिरिक्त पानी की आवक नहीं हुई। दूसरी ओर शहर में पानी की नियमित आपूर्ति जारी रही।

इसी कारण कुल उपयोगी स्टोरेज शनिवार के मुकाबले रविवार को थोड़ा नीचे आया। मुंबई में घरेलू उपयोग के अलावा व्यावसायिक और अन्य आवश्यकताओं के लिए भी बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। ऐसे में सातों जलाशयों में मौजूद पानी का स्तर शहर की जल व्यवस्था के लिए अहम संकेतक माना जाता है। हाइड्रोलिक इंजीनियर विभाग की रिपोर्ट से फिलहाल यह साफ है कि जलाशयों में पानी का भंडार काफी ऊंचे स्तर पर है।

कुल क्षमता 1,447,363 मिलियन लीटर के मुकाबले 1,405,980 मिलियन लीटर उपयोगी पानी उपलब्ध है। आने वाले दिनों में कैचमेंट क्षेत्रों में बारिश होती है या नहीं, इसका असर जलाशयों के स्तर पर दिखाई देगा। बारिश नहीं होने पर नियमित जलापूर्ति के कारण पानी का स्टॉक धीरे-धीरे नीचे आता रहेगा। वहीं बारिश का नया दौर शुरू होने पर जलाशयों में पानी की आवक बढ़ सकती है। फिलहाल मुंबई के सातों जलाशयों में संयुक्त रूप से 97.14 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। एक दिन पहले के 97.37 प्रतिशत के मुकाबले मामूली कमी जरूर दर्ज की गई है, लेकिन कुल जल भंडार अभी भी उच्च स्तर पर बना हुआ है।