मुंबई : फर्जी दस्तावेजों पर बैंक खाते खोलकर साइबर ठगों को बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ !
Mumbai: Gang busted for opening bank accounts using forged documents and selling them to cyber fraudsters!
मामला एक साइबर धोखाधड़ी की शिकायत से सामने आया, जिसमें इमाम मिर्जा नाम के व्यक्ति के मोबाइल फोन को कथित तौर पर हैक किए जाने के बाद उनके बैंक खाते से 1.97 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इस मामले में उनकी शिकायत के आधार पर 13 अगस्त को एग्रीपाडा थाने में साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था।
मुंबई : गोवंडी निवासी 47 वर्षीय इज़हार शेख को साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले में सेशंस कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। शेख पर आरोप है कि उन्होंने अलग-अलग नामों से कई बैंक खाते खुलवाए और बाद में इन खातों को कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी करने वाले लोगों को सौंप दिया। जांच में सामने आया है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल देशभर में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के 47 से अधिक मामलों में किया गया।
मामला एक साइबर धोखाधड़ी की शिकायत से सामने आया, जिसमें इमाम मिर्जा नाम के व्यक्ति के मोबाइल फोन को कथित तौर पर हैक किए जाने के बाद उनके बैंक खाते से 1.97 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इस मामले में उनकी शिकायत के आधार पर 13 अगस्त को एग्रीपाडा थाने में साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था।
मामले की जांच आगे बढ़ने के दौरान पुलिस को बैंक खाते से जुड़े लेनदेन और अन्य जानकारियों के आधार पर इज़हार शेख के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया। जांच में पुलिस ने कथित तौर पर ऐसे बैंक खातों का पता लगाया, जिनका इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन में किया गया था।
पुलिस का आरोप है कि शेख ने अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करके कई बैंक खाते खोले। बाद में इन खातों को साइबर अपराध में शामिल लोगों को उपलब्ध कराया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के 47 से अधिक मामलों में हुआ। अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पुलिस जांच से जुड़े तथ्यों को रखा गया। पुलिस की ओर से मामले की गंभीरता और बैंक खातों के कथित इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया गया। इसके बाद अदालत ने शेख को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
मामले की शुरुआत इमाम मिर्जा की शिकायत से हुई थी। शिकायत के अनुसार उनका मोबाइल फोन हैक होने के बाद उनके बैंक खाते से 1.97 लाख रुपये निकाल लिए गए। राशि निकलने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। 13 अगस्त को एग्रीपाडा पुलिस थाने में साइबर धोखाधड़ी से संबंधित मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने डिजिटल लेनदेन और बैंक खातों की जांच शुरू की। साइबर अपराध की जांच में बैंक खाते और पैसों के लेनदेन की जानकारी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि धोखाधड़ी से हासिल रकम को कई खातों के माध्यम से आगे भेजे जाने की आशंका रहती है।
पुलिस जांच के दौरान शेख का नाम सामने आने के बाद उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया। पुलिस ने कथित तौर पर उनके द्वारा खोले गए विभिन्न बैंक खातों की जानकारी जुटाई। जांच में यह आरोप सामने आया कि अलग-अलग नामों से खोले गए खातों को बाद में साइबर अपराधियों को सौंपा गया था। ऐसे बैंक खातों को आमतौर पर साइबर अपराध की भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ के तौर पर देखा जाता है, जिनका इस्तेमाल अपराध से प्राप्त रकम को प्राप्त करने या आगे भेजने के लिए किया जाता है।
हालांकि इस मामले में शेख की भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। पुलिस का दावा है कि शेख से जुड़े खातों का इस्तेमाल केवल एक मामले में नहीं हुआ, बल्कि देशभर में दर्ज 47 से अधिक साइबर धोखाधड़ी के मामलों में इनका इस्तेमाल किया गया। इस कारण जांच का दायरा भी बढ़ गया है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग नामों से कितने बैंक खाते खोले गए थे, उनमें किस तरह के लेनदेन हुए और इन खातों का इस्तेमाल किन लोगों ने किया। इसके अलावा पुलिस कथित तौर पर शेख और साइबर अपराधियों के बीच संपर्क तथा पैसों के लेनदेन से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।
इमाम मिर्जा के मामले में 1.97 लाख रुपये की रकम खाते से निकलने के बाद पुलिस ने डिजिटल ट्रांजैक्शन की जानकारी खंगाली। साइबर धोखाधड़ी के मामलों में रकम के ट्रेल को ट्रैक करना जांच का अहम हिस्सा होता है। इसी प्रक्रिया के दौरान पुलिस को ऐसे बैंक खातों से जुड़े सुराग मिले, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर धोखाधड़ी की रकम के लिए किया गया था। सेशंस कोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग करते हुए शेख की ओर से राहत की कोशिश की गई थी।
हालांकि अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामले में पुलिस की जांच जारी रहेगी। पुलिस के लिए अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित तौर पर अलग-अलग नामों से बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया किस तरह की गई। साथ ही यह भी जांच का हिस्सा होगा कि खातों को साइबर अपराधियों तक कैसे पहुंचाया गया और इनके बदले किसी तरह का आर्थिक लाभ लिया गया या नहीं। 47 से अधिक साइबर धोखाधड़ी के मामलों से कथित संबंध सामने आने के कारण पुलिस देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज मामलों की जानकारी भी खंगाल सकती है। अलग-अलग मामलों में इस्तेमाल हुए बैंक खातों और लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने से कथित नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट हो सकती है। साइबर अपराध के मामलों में अपराधी अक्सर डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए पीड़ित के खाते से रकम निकालते हैं और उसे अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर करते हैं।
इसके बाद रकम को कई स्तरों पर आगे भेजे जाने की स्थिति बन सकती है। ऐसे मामलों में पुलिस बैंक खातों के रिकॉर्ड और डिजिटल लेनदेन के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास करती है। इज़हार शेख के मामले में भी पुलिस ने इसी तरह बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की। पुलिस का आरोप है कि शेख ने अलग-अलग नामों से खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया। अदालत में अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए जांच से जुड़े इन्हीं पहलुओं को महत्व दिया गया।
फिलहाल मामले में शेख के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं। अदालत ने अग्रिम जमानत से इनकार किया है, लेकिन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसी इमाम मिर्जा के खाते से निकाली गई 1.97 लाख रुपये की रकम से जुड़े लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है। 13 अगस्त को दर्ज इस मामले से शुरू हुई जांच में सामने आए बैंक खातों के जरिए पुलिस देशभर में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के अन्य मामलों की कड़ियां तलाश रही है। पुलिस के अनुसार, शेख से जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल 47 से अधिक मामलों में किया गया।
अब जांच का एक प्रमुख पहलू इन मामलों के बीच वित्तीय और डिजिटल संबंधों का पता लगाना है। इसके साथ ही कथित तौर पर खातों का इस्तेमाल करने वाले लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच भी की जाएगी। अदालत द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के बाद पुलिस को मामले की जांच आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।
जांच में बैंकिंग दस्तावेज, डिजिटल ट्रांजैक्शन और संबंधित लोगों से पूछताछ के जरिए मामले की पूरी कड़ी सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल इज़हार शेख पर अलग-अलग नामों से बैंक खाते खोलकर उन्हें कथित साइबर ठगों को देने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि इन खातों का इस्तेमाल देशभर में 47 से अधिक साइबर धोखाधड़ी के मामलों में हुआ। वहीं, एग्रीपाडा में दर्ज मामले में शिकायतकर्ता के खाते से 1.97 लाख रुपये निकलने के बाद शुरू हुई जांच अब कथित बैंक खाता नेटवर्क तक पहुंच गई है।


