मुंबई : बीएमसी के 100 डॉक्टरों को नोटिस... केईएम, सायन, नायर समेत पांच प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टरों पर कार्रवाई
Mumbai: Notices issued to 100 BMC doctors... Action taken against doctors from five major hospitals, including KEM, Sion, and Nair.
बीएमसी प्रशासन द्वारा प्रोफेसर डॉक्टर पर उनकी उपस्थिति को लेकर दिया दिशा निर्देश से हो रही परेशानी और नोटिस को लेकर समय से पहले ही नौकरी छोड़ने की तैयारी दिखाई है इसमें केईएम के तीन मुख्य डॉक्टर मुख्य रूप से हैं। डॉक्टरों ने बड़े पैमाने पर वीआरएस लेने की तैयारी कर रहे हैं।
मुंबई : बीएमसी ने ड्यूटी से लंबे समय तक गैरहाजिर रहने के आरोप में करीब 100 डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इनमें प्रमुख अस्पतालों के डीन भी शामिल हैं। बीएमसी को शिकायतें मिली थीं कि कुछ डॉक्टर ड्यूटी के समय अस्पताल परिसर से बाहर जाकर निजी क्लीनिक में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
बीएमसी के मेडिकल एजुकेशन एवं प्रमुख अस्पतालों के निदेशक डॉ. शैलेश मोहिते के अनुसार, ये नोटिस पांच प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टरों को दिए गए हैं। इनमें केईएम अस्पताल के 36, सायन अस्पताल के 30, नायर अस्पताल के 24, कूपर अस्पताल के नौ और नायर डेंटल अस्पताल के एक डॉक्टर शामिल हैं। केईएम अस्पताल के डीन डॉ. हरीश पाठक को भी कारण बताओ नोटिस दिया गया है। डॉ. मोहिते ने बताया कि डीन को अपने अधीन काम करने वाले डॉक्टरों की उपस्थिति पर नजर रखने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि डॉक्टर ड्यूटी के दौरान अस्पताल में उपलब्ध रहें।
बीएमसी ने स्पष्ट किया है कि केवल अस्पताल में मौजूद रहना ही पर्याप्त नहीं होगा। डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति, ड्यूटी के दौरान उनकी सक्रियता और काम के परिणाम पर भी नजर रखी जाएगी। अस्पताल प्रशासन को ऐसे डॉक्टरों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। बीएमसी के नियमों के अनुसार डॉक्टरों को आधिकारिक कार्य समय के दौरान निजी प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं है। डॉक्टरों को आमतौर पर सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक अस्पताल में उपलब्ध रहना होता है। हालांकि, कुछ डॉक्टरों की ड्यूटी 24 से 36 घंटे तक भी चल सकती है।
बीएमसी प्रशासन द्वारा प्रोफेसर डॉक्टर पर उनकी उपस्थिति को लेकर दिया दिशा निर्देश से हो रही परेशानी और नोटिस को लेकर समय से पहले ही नौकरी छोड़ने की तैयारी दिखाई है इसमें केईएम के तीन मुख्य डॉक्टर मुख्य रूप से हैं। डॉक्टरों ने बड़े पैमाने पर वीआरएस लेने की तैयारी कर रहे हैं।
नोटिस पाने वाले कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उपस्थिति को ही उनकी कार्यक्षमता का आधार बनाए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कई विशेषज्ञ निर्धारित समय के बाद भी अस्पताल में रहकर आपातकालीन सेवाएं, जटिल ऑपरेशन, जांच, शोध, शिक्षण और जूनियर डॉक्टरों का मार्गदर्शन करते हैं।
केईएम के डीन डॉ. पाठक ने कहा कि कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों का काम नियमित ड्यूटी के घंटों से आगे तक चलता है। उनके अनुसार, विशेषज्ञ डॉक्टरों के योगदान का आकलन केवल उपस्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि उनके क्लीनिकल काम और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई विशेषज्ञों को निजी अस्पतालों में अधिक वेतन के अवसर मिल सकते हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में अनुभवी विशेषज्ञों को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन मॉर्ड के अध्यक्ष डॉ. मयूर चौधरी ने कहा कि उपस्थिति प्रणाली में रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा किए जाने वाले लंबे घंटों के काम को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी से मरीजों का दबाव बढ़ता है और मुंबई महानगर क्षेत्र के साथ-साथ महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों से भी मरीज विशेषज्ञ उपचार के लिए इन अस्पतालों में आते हैं।


