Municipal Corporation
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Read More... KDMC में होर्डिंग घोटाले का बड़ा खुलासा! 600 में करीब 400 होर्डिंग अवैध, 60 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान
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By Rokthok Lekhani
KDMC की जांच में कल्याण, डोंबिवली और टिटवाला क्षेत्र में करीब 400 अनधिकृत होर्डिंग्स पाए गए हैं। 2014 के बाद नई प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया नहीं होने के कारण महानगरपालिका को करीब ₹50–60 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान है। प्रशासन ने सर्वे, बकाया वसूली और अवैध होर्डिंग्स हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। मुंबई : मनपा की हेरीटेज इमारत में लगे दीमक... घटिया काम करने वाले ठेकेदार पर होगी कार्रवाई!
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By Online Desk
बीएमसी मुख्यालय की विस्तारित इमारत के नवीनीकरण कार्य की जानकारी देते हुए स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने बताया कि यह काम 31 अगस्त 2009 को स्थायी समिति के प्रस्ताव के अनुसार शानदार इंटीरियर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया गया था। बाद में कार्य की अवधि बढ़ाई गई और यह काम वर्ष 2023 तक जारी रहा। प्रभाकर शिंदे ने कहा कि संबंधित ठेकेदार ने अब तक किस गुणवत्ता का काम किया है और निर्माण कार्य में कितनी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि काम में लापरवाही या घटिया गुणवत्ता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। बीएमसी मुख्यालय जैसी ऐतिहासिक इमारत में दीमक और रखरखाव की समस्या सामने आने के बाद अब भवन की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। पिंपरी-चिंचवड महापालिका के ₹60 करोड़ घोटाले में ‘सेटिंग’ के आरोप, प्रशासन और सत्ताधारियों पर उठे सवाल
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By Rokthok Lekhani
पिंपरी-चिंचवड महापालिका के कथित ₹60 करोड़ घोटाले में प्रशासन और सत्ताधारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। फर्जी उपसूचनाओं के जरिए ठेकेदारों को भुगतान का आरोप है। नासिक : म्हाडा घोटाला... 59 बिल्डरों को नोटिस, मनपा की बड़ी कार्रवाई; अब जांच के घेरे में डेवलपर्स
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By Online Desk
इस मामले में मनपा ने 59 विकासकों (डेवलपर्स) को नोटिस जारी किए हैं। तत्कालीन अधिकारियों द्वारा दी गई ले आउट मंजूरियां अब गहन जांच के घेरे में हैं। जांच में सामने आया है कि बिल्डरों ने म्हाडा के नियमों से बचने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची थी। नियमानुसार, एक निश्चित क्षेत्र से बड़े भूखंड पर म्हाडा के लिए घर देना अनिवार्य होता है। इस अनिवार्य शर्त को टालने के लिए बिल्डरों ने जमीन के बड़े टुकड़ों को एक एकड़ से कम के छोटे-छोटे ले-आउट में बांट दिया। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए भूमि अभिलेख विभाग की फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया। 
