मुंबई: अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड और गैर-कानूनी ऑनलाइन गेमिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश
Mumbai: International cyber fraud and illegal online gaming syndicate exposed
मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-2 ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड और गैर-कानूनी ऑनलाइन गेमिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच की टीम ने गोवा के कैंडोलिम स्थित एक आलीशान विला में छापेमारी कर 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी को आशंका है कि यह गिरोह पिछले छह महीनों से साइबर अपराध के जरिए हासिल की गई 500 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से इधर-उधर कर मनी लॉन्ड्रिंग कर रहा था।
मुंबई: मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-2 ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड और गैर-कानूनी ऑनलाइन गेमिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच की टीम ने गोवा के कैंडोलिम स्थित एक आलीशान विला में छापेमारी कर 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी को आशंका है कि यह गिरोह पिछले छह महीनों से साइबर अपराध के जरिए हासिल की गई 500 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से इधर-उधर कर मनी लॉन्ड्रिंग कर रहा था।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के दौरान इस रैकेट से जुड़े विभिन्न बैंक खातों में मौजूद करीब 100 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक बड़ी सफलता है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, इनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और पैसों के लेनदेन की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि आरोपी एक सुनियोजित तरीके से साइबर फ्रॉड और अवैध ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों को संचालित कर रहे थे। आरोपियों ने गोवा के कैंडोलिम में स्थित एक महंगे विला को किराए पर लिया था, जहां से इस पूरे नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, यह विला सामान्य रहने के लिए नहीं बल्कि साइबर अपराध की गतिविधियों को अंजाम देने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा था।
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि गिरोह में शामिल लोगों को अपराध में शामिल करने से पहले विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपियों को लगभग 15 दिनों तक ट्रेनिंग दी गई, जिसमें उन्हें कई बैंक खातों के माध्यम से तेजी से पैसे ट्रांसफर करने, लेनदेन छिपाने और साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के तरीके सिखाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में शामिल आरोपी कुछ ही मिनटों में बड़ी रकम को कई बैंक खातों में ट्रांसफर करने की क्षमता रखते थे। इसके लिए वे अलग-अलग खातों, डिजिटल माध्यमों और अन्य वित्तीय चैनलों का इस्तेमाल करते थे, ताकि जांच एजेंसियों को लेनदेन की वास्तविक जानकारी आसानी से न मिल सके।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस सिंडिकेट का नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर फ्रॉड से जुटाई गई रकम किन देशों या किन नेटवर्क के माध्यम से संचालित की जा रही थी। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि अवैध ऑनलाइन गेमिंग के जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
मुंबई क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। हाल के वर्षों में ऑनलाइन ठगी, डिजिटल फ्रॉड और अवैध गेमिंग से जुड़े मामलों में तेजी आई है। अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने और बड़ी रकम को छिपाने के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे मामलों में वित्तीय लेनदेन की जांच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है।


