मराठा आरक्षण: महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में रखा पक्ष— 'मराठा समुदाय को OBC के भीतर उप-श्रेणी (Sub-category) माना जा सकता है'
Maratha Reservation: Maharashtra government tells Bombay High Court that the Maratha community can be considered a sub-category within the OBC category.
मराठा आरक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा कि मराठा समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के भीतर एक 'उप-श्रेणी' (Sub-category) के रूप में माना जा सकता है। सरकार के अनुसार, ओबीसी कोटे का उप-वर्गीकरण करने से मूल ओबीसी श्रेणियों के हितों को प्रभावित किए बिना न्यायसंगत आरक्षण दिया जा सकता है।
मुंबई: मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष एक महत्वपूर्ण सैद्धांतिक और कानूनी रुख पेश किया है। राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि मराठा समुदाय के सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को देखते हुए उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की मौजूदा सूची के भीतर ही एक 'उप-श्रेणी' (Sub-category) के रूप में वर्गीकृत करने पर विचार किया जा सकता है।
हाईकोर्ट में प्रस्तुत अपने हलफनामे और दलीलों में सरकार ने तर्क दिया कि ओबीसी कोटा के भीतर उप-वर्गीकरण (Sub-categorization) करने से आरक्षण का लाभ अधिक न्यायसंगत तरीके से वितरित किया जा सकेगा और इससे पहले से मौजूद ओबीसी जातियों के अधिकारों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
प्रमुख बिंदु:
- ओबीसी के भीतर उप-श्रेणी का सुझाव: राज्य सरकार ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णयों के तहत राज्यों को पिछड़ी श्रेणियों के भीतर उप-वर्गीकरण (Sub-classification) करने का अधिकार प्राप्त है, ताकि सबसे कमजोर और पिछड़े वर्गों तक लाभ पहुंच सके।
- मौजूदा OBC कोटे में असंतुलन से बचाव: सरकार का कहना है कि मराठा समाज को ओबीसी के तहत एक अलग उप-समूह मानकर आरक्षण का प्रावधान करने से अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों में आरक्षण के बंटवारे को लेकर असंतोष कम होगा।
- याचिकाकर्ताओं का रुख: याचिकाकर्ताओं और आरक्षण विरोधी समूहों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए तर्क दिया कि मराठा समुदाय एक सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली वर्ग है, इसलिए उन्हें ओबीसी सूची में किसी भी रूप में शामिल करना असंवैधानिक होगा।


