एनआईए की बड़ी कार्रवाई: 1996 श्रीनगर हिंसा मामले में शब्बीर अहमद शाह और 5 हुर्रियत नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

Major NIA action: Chargesheet filed against Shabir Ahmad Shah and 5 Hurriyat leaders in 1996 Srinagar violence case

एनआईए की बड़ी कार्रवाई: 1996 श्रीनगर हिंसा मामले में शब्बीर अहमद शाह और 5 हुर्रियत नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

  • घटना: वर्ष 1996 में श्रीनगर में हुई हिंसा।
  • मुख्य आरोपी: हुर्रियत नेता शब्बीर अहमद शाह और 5 अन्य सहयोगी।
  • एजेंसी: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की।
  • आरोप: साजिश रचने, हिंसा भड़काने और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल होना।
  • महत्व: तीन दशक पुराने मामले में यह चार्जशीट अलगाववादी नेतृत्व के खिलाफ सरकार और जांच एजेंसियों के कड़े रुख को दर्शाती है।

नई दिल्ली/श्रीनगर: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने तीन दशक पुराने एक गंभीर मामले में बड़ा कदम उठाते हुए हुर्रियत कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता शब्बीर अहमद शाह और पांच अन्य कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला वर्ष 1996 में श्रीनगर में हुई भीषण हिंसा और उससे संबंधित आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा है।

क्या है 1996 का मामला?

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जांच एजेंसी के अनुसार, 1996 में श्रीनगर में हुई हिंसा सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य घाटी में अशांति फैलाना और सरकारी तंत्र को चुनौती देना था। एनआईए ने अपनी व्यापक जांच में पाया कि इन नेताओं ने उस दौरान न केवल हिंसा भड़काने में भूमिका निभाई थी, बल्कि वे प्रतिबंधित संगठनों के साथ मिलकर देश विरोधी गतिविधियों में भी शामिल थे। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रियाओं और साक्ष्यों के संकलन के बाद, अब एनआईए ने इन नेताओं के खिलाफ ठोस सबूतों के साथ चार्जशीट कोर्ट में पेश की है।

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चार्जशीट में शामिल अन्य आरोपी

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शब्बीर अहमद शाह के अलावा, चार्जशीट में जिन अन्य पांच हुर्रियत नेताओं को नामजद किया गया है, वे सभी दशकों से अलगाववादी राजनीति और घाटी में सक्रिय विरोध प्रदर्शनों का चेहरा रहे हैं। एनआईए के अनुसार, ये सभी नेता अलग-अलग समय पर हिंसा को प्रायोजित करने और उसे अंजाम देने वाले गिरोहों के संपर्क में थे।

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एनआईए का कड़ा रुख

एनआईए के प्रवक्ता ने कहा कि भले ही घटना पुरानी है, लेकिन कानून के तहत समय की सीमा (statute of limitations) इस तरह के गंभीर अपराधों (जैसे राष्ट्र विरोधी गतिविधियां) पर लागू नहीं होती। एनआईए का मुख्य ध्यान घाटी में उन 'पुराने घावों' और आपराधिक नेटवर्क को उजागर करना है, जिन्होंने सालों तक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद को खाद-पानी दिया।

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