महाराष्ट्र में दूध बिक्री के नियमों में बड़ा बदलाव: FDA का सख्त आदेश, बिना लेबल के खुला दूध बेचना होगा प्रतिबंधित
Major change in milk sale rules in Maharashtra: FDA issues strict order, selling of loose milk without label will be banned
- मुख्य नियम: महाराष्ट्र में खुले दूध की बिक्री पर प्रतिबंध; अब सिर्फ सीलबंद और लेबल वाले दूध की अनुमति।
- चेतावनी: कच्चे दूध (Raw Milk) के पैकेट पर 'उबालना अनिवार्य' और 'कच्चा दूध' का लेबल लगाना जरूरी है।
- दंड: नियमों की अनदेखी या मिलावट मिलने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और लाइसेंस रद्दीकरण की कार्रवाई।
- उद्देश्य: दूध की आपूर्ति में पारदर्शिता लाना और मिलावटखोरी पर नकेल कसना।
मुंबई: महाराष्ट्र में दूध की गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों को सुनिश्चित करने के लिए राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एक बड़ा और सख्त निर्णय लिया है। अब राज्य में कहीं भी खुले (loose) और बिना लेबल वाले दूध की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। FDA के नए आदेशों के अनुसार, उपभोक्ताओं तक पहुँचने वाला हर लीटर दूध अब सीलबंद और उचित लेबलिंग के साथ ही होना चाहिए।
क्या हैं नए दिशा-निर्देश?
FDA ने दूध वितरण की पूरी आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) के लिए कड़े मानक तय किए हैं:
- सीलबंद और लेबलिंग अनिवार्य: अब केवल सीलबंद, उचित लेबल लगे और छेड़छाड़-रोधी (tamper-evident) पैकेजिंग वाले दूध की ही बिक्री की जा सकेगी।
- कच्चे दूध (Raw Milk) के लिए चेतावनी: यदि कोई विक्रेता कच्चा दूध बेच रहा है, तो उस पर "RAW MILK" का स्पष्ट लेबल होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, उपभोक्ता को जागरूक करने के लिए उस पर 'सेवन से पहले उबालना जरूरी है' (boiling is mandatory before consumption) की चेतावनी भी छापनी होगी।
- आपूर्ति श्रृंखला पर निगरानी: ये नियम दूध संग्रह केंद्रों (chilling centers), परिवहन इकाइयों और प्रोसेसिंग प्लांट सहित पूरी 'फार्म-टू-टेबल' श्रृंखला पर लागू होंगे।
उल्लंघन पर भारी जुर्माना: FDA ने साफ कर दिया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने, मिलावट करने या गलत लेबलिंग करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, बार-बार नियम तोड़ने वाले विक्रेताओं और वितरकों के लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
विक्रेताओं के लिए जवाबदेही:
इस आदेश के बाद अब दूध विक्रेताओं और वितरण केंद्रों को स्वच्छता मानकों, तापमान रिकॉर्ड और दूध की ट्रैसेबिलिटी (traceability) का कड़ाई से पालन करना होगा। यह कदम विशेष रूप से मिलावट को रोकने और उपभोक्ताओं को शुद्ध उत्पाद उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया है।


