राम मंदिर ट्रस्ट विवाद: चंपत राय ने SIT की रिपोर्ट के दावों को नकारा, कहा - 'नकद गिनती के नियम मैंने नहीं, अनिल मिश्रा और SBI ने तय किए'

Ram Mandir Trust controversy: Champat Rai refutes claims in the SIT report, stating, "I did not set the rules for counting cash; Anil Mishra and SBI did."

राम मंदिर ट्रस्ट विवाद: चंपत राय ने SIT की रिपोर्ट के दावों को नकारा, कहा - 'नकद गिनती के नियम मैंने नहीं, अनिल मिश्रा और SBI ने तय किए'

  • विवाद का केंद्र: राम मंदिर में दान की गई राशि की गिनती और उसके प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताएं।
  • चंपत राय का बचाव: उन्होंने नकद गिनती के नियमों को मंजूरी देने से इनकार किया और कहा कि इन पर डॉ. अनिल मिश्रा और SBI मैनेजर के हस्ताक्षर थे।
  • जांच का मोड़: एसआईटी अब उन दस्तावेजों और हस्ताक्षरकर्ता अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन्होंने इन नियमों को लागू किया था।
  • ट्रस्ट की स्थिति: चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार हो चुके हैं; ट्रस्ट ने अपनी साख बचाने के लिए प्रशासन में बड़े बदलाव किए हैं।

अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मचे घमासान के बीच, पूर्व महासचिव चंपत राय ने एसआईटी (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। चंपत राय ने मंदिर के दानपात्रों की नकद गिनती (cash-counting) से जुड़े नियमों की जिम्मेदारी लेने से इनकार करते हुए सारा ठीकरा ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों और बैंक अधिकारियों पर फोड़ दिया है।

​एसआईटी को सौंपे गए अपने लिखित बयान में चंपत राय ने स्पष्ट किया है कि फरवरी 2025 में लागू किए गए नकद गिनती के विवादित नियम उनके द्वारा अनुमोदित नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नियमों वाले दस्तावेजों पर केवल ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के मुख्य प्रबंधक के हस्ताक्षर थे, उनके नहीं।

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"मैं अनभिज्ञ था, जिम्मेदारी मेरी नहीं"

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चंपत राय ने अपने बयान में दावा किया कि उन्हें इन विवादास्पद नकद गिनती के दिशानिर्देशों के बारे में जानकारी जून 2026 में जाकर मिली, जब यह मामला सार्वजनिक हुआ। उनका कहना है:

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​"अगस्त 2020 से जून 2026 के बीच ट्रस्ट के सभी प्रमुख अनुबंध दस्तावेजों (contract documents) पर मेरे हस्ताक्षर हैं, सिवाय इस नकद गिनती वाली नीति के। यदि यह नीति इतनी महत्वपूर्ण थी, तो मेरे वापस आने तक इसका इंतजार क्यों नहीं किया गया?"

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​उन्होंने एसआईटी से आग्रह किया है कि उनके इस लिखित जवाब को जांच का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई है और संकेत दिया है कि इस पूरे मामले में उन्हें 'बलि का बकरा' बनाने की कोशिश की जा रही है।

SBI की भूमिका पर भी उठाए सवाल

चंपत राय ने अपनी सफाई में फरवरी 2024 में हुए उस समझौते (MoU) का भी जिक्र किया, जो ट्रस्ट और एसबीआई के बीच हुआ था। उन्होंने कहा कि उस MoU के हर पन्ने पर उनके हस्ताक्षर थे, जिसमें सीसीटीवी कैमरों और लोहे की ग्रिल लगाने जैसी सुरक्षा शर्तों का जिक्र था, लेकिन बाद में लागू की गई नकद गिनती की नीति उन सुरक्षा प्रोटोकॉल से अलग थी, जिस पर उन्होंने कभी दस्तखत नहीं किए।

​उधर, ट्रस्ट की बैठक के बाद से ही चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं और अब प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन (कृष्ण मोहन) को सौंपी गई है। चंपत राय का कहना है कि वे एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट (Final Report) का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद वे बिंदु-दर-बिंदु (point-by-point) सार्वजनिक जवाब देंगे।

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