समोसा खरीदने के लिए लोको पायलट ने बीच रास्ते में रोकी इंदौर-महू ट्रेन? सोशल मीडिया के दावे पर रेलवे ने दी बड़ी सफाई
Did the loco pilot stop the Indore-Mhow train midway to buy samosas? Railways issues a major clarification regarding the social media claim.
- वायरल दावा: इंदौर-महू मार्ग पर एक लोको पायलट ने समोसा खरीदने के लिए ट्रेन को बीच रास्ते में रोक दिया।
- रेलवे का स्पष्टीकरण: पश्चिमी रेलवे (WR) ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ट्रेन सिग्नल या किसी अन्य तकनीकी/परिचालन कारणों से रुकी थी, न कि समोसा खरीदने के लिए।
- अधिकारियों की अपील: वीडियो में दिख रही घटना को गलत संदर्भ में पेश किया गया है। लोग सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही ऐसी भ्रामक खबरों से सावधान रहें।
इंदौर: सोशल मीडिया पर अक्सर कुछ ऐसे अतरंगे वीडियो वायरल हो जाते हैं, जिन्हें देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर) ने सिर्फ समोसा खरीदने के लिए इंदौर-महू (Mhow) पैसेंजर ट्रेन को बीच रास्ते में रोक दिया। हालांकि, अब इस पूरे मामले पर पश्चिमी रेलवे (Western Railway) ने सामने आकर सच्चाई बताई है और वायरल दावे को पूरी तरह भ्रामक (Misleading) करार दिया है।
क्या है वायरल वीडियो का दावा?
इंटरनेट पर प्रसारित हो रहे इस वीडियो में कथित तौर पर देखा जा सकता है कि इंदौर-महू रूट पर एक ट्रेन किसी रेलवे क्रॉसिंग या आउटर के पास रुकी हुई है। इसी दौरान एक व्यक्ति दौड़कर आता है और इंजन के केबिन में मौजूद लोको पायलट को खाने का एक पैकेट (समोसे) थमाता है। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने रेलवे के अनुशासन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए और दावा किया कि ड्राइवर ने अपनी 'समोसा क्रेविंग' को शांत करने के लिए पूरी ट्रेन ही रोक दी।
पश्चिमी रेलवे ने खारिज किया दावा
मामला बढ़ने पर पश्चिमी रेलवे के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने इस पर स्थिति स्पष्ट की है। रेलवे प्रशासन ने साफ किया है कि ट्रेन को समोसा खरीदने के लिए नहीं रोका गया था।
रेलवे का आधिकारिक रुख: "ट्रेन को अपनी मर्जी से बीच रास्ते में रोकने का अधिकार किसी भी लोको पायलट के पास नहीं होता है। वायरल वीडियो पूरी तरह से भ्रामक है। ट्रेन असल में किसी परिचालन संबंधी कारण (Operational Reasons) या सिग्नल (Clearance) न मिलने की वजह से वहां रुकी हुई थी। जब ट्रेन वहां खड़ी थी, तब किसी स्थानीय व्यक्ति ने लोको पायलट को खाने का सामान दिया। इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि ट्रेन को समोसे के लिए रोका गया था।"
रेलवे ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर बिना संदर्भ (Context) के वायरल होने वाले ऐसे भ्रामक वीडियो और अफवाहों पर विश्वास न करें। ट्रेनों का संचालन बेहद कड़े नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत किया जाता है।


