अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामला: चंपत राय और ट्रस्ट के अन्य अधिकारियों के खिलाफ FIR की मांग, वकीलों का जोरदार प्रदर्शन
Ayodhya Ram Mandir donation theft case: Demand for FIR against Champat Rai and other trust officials; lawyers stage strong protest.
अयोध्या में फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों ने राम मंदिर की दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर विरोध मार्च निकाला। वकीलों ने पुलिस को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है और कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। इस मामले में पहले ही SIT की जांच के बाद 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
अयोध्या: राम मंदिर दान राशि में कथित हेराफेरी (गबन) का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों ने इस मामले को लेकर अयोध्या में एक बड़ा विरोध मार्च निकाला और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। वकीलों की मांग है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
दिलचस्प बात यह है कि वकीलों ने अपनी शिकायत में कृष्ण मोहन को भी आरोपी बनाया है, जो कि इस मामले में पहली FIR दर्ज कराने वाले मूल शिकायतकर्ता थे। फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा के नेतृत्व में वकीलों का यह हुजूम अदालत परिसर से पैदल मार्च करते हुए राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन पहुंचा। इस दौरान वकीलों ने ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
पुलिस थाने में हंगामा, बड़े आंदोलन की चेतावनी
मार्च के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ वकीलों ने धक्का-मुक्की में मामूली चोटें आने का भी दावा किया है। थाने पहुंचने के बाद वकील स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के दफ्तर में जमा हो गए और तुरंत केस दर्ज करने पर अड़ गए।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मिश्रा ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा, "हमने लिखित शिकायत सौंप दी है। अगर पुलिस इस मामले में चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव और कृष्ण देव के खिलाफ केस दर्ज नहीं करती है, तो हम एक बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।" वहीं, पुलिस अधिकारियों ने वकीलों को शांत कराते हुए आश्वासन दिया है कि शिकायत की पूरी जांच की जाएगी और कानून के दायरे में उचित कार्रवाई होगी।
कैसे शुरू हुआ यह विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा राम मंदिर के दान में भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। SIT की शुरुआती जांच रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने एक FIR दर्ज की थी और दान राशि की गिनती प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में जांच टीम चंपत राय का बयान भी दर्ज कर चुकी है, जिन्होंने कथित तौर पर 'नैतिक जिम्मेदारी' लेते हुए अपने इस्तीफे की पेशकश भी की थी।


