माहिम में मुंबई पब्लिक स्कूल माहिम बंद होने पर बवाल! सोशल एक्टिविस्ट गिरीश राउत ने उठाए सवाल
Mahim में Mumbai Public School Mahim बंद होने पर बवाल! Social Activist Girish Raut ने उठाए सवाल
- विवाद का मुद्दा: माहिम स्थित ऐतिहासिक 'न्यू माहिम सेकेंडरी स्कूल' को ढहाने की बीएमसी की योजना का विरोध।
- स्कूल क्षमता: इस स्कूल में कुल 2,500 छात्रों की संख्या थी।
- प्रमुख तर्क: 'शशांक एंड एसोसिएट्स' की स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक इमारत ढहने की स्थिति में नहीं है और मरम्मत के योग्य है।
- प्रशासनिक चूक: बिना सार्वजनिक नोटिस दिए स्कूल बंद करना और छात्रों की पढ़ाई बाधित करना स्थानीय लोगों में आक्रोश का मुख्य कारण है।
- मांग: इमारत को गिराने के बजाय उसकी मरम्मत (structural repair) की जाए और इसे बच्चों के लिए फिर से खोला जाए।
मुंबई: माहिम स्थित 'न्यू माहिम सेकेंडरी स्कूल' के अचानक बंद होने और उसे तोड़े जाने की योजना के खिलाफ स्थानीय नागरिकों और पूर्व छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। सुप्रसिद्ध वकील और पर्यावरण प्रेमी गिरीश राउत ने इस मुद्दे को उठाते हुए बीएमसी (BMC) प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार इमारत सुरक्षित है और इसे तोड़ने के बजाय मरम्मत (repair) करके पुनः शुरू किया जा सकता है।
सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र रहा है यह स्कूल
यह स्कूल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं है, बल्कि दशकों से मराठी नाट्य और सांस्कृतिक गतिविधियों का एक प्रमुख स्थान रहा है। यहाँ सयाजी शिंदे, सुलभा देशपांडे और रोहिणी हट्टंगड़ी जैसे दिग्गज कलाकार अपने अभिनय का अभ्यास करते रहे हैं। करीब 2,500 छात्रों की क्षमता वाले इस स्कूल में मराठी, हिंदी, इंग्लिश, उर्दू और कन्नड़ माध्यमों में शिक्षा दी जाती थी।
ऑडिट रिपोर्ट में इमारत को बताया गया 'मजबूत'
वकील गिरीश राउत ने बीएमसी द्वारा नियुक्त फर्म 'शशांक एंड एसोसिएट्स' की सितंबर 2025 की स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इमारत 'C1' (खतरनाक) श्रेणी में नहीं है। रिपोर्ट में इसे 'C2-A' श्रेणी में रखा गया है और केवल मामूली मरम्मत की सिफारिश की गई है।
प्रशासन की पारदर्शिता पर संदेह
गिरीश राउत ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा:
"अगर स्कूल वाकई इतना जर्जर था कि वह कभी भी गिर सकता था, तो मई 2026 तक इसे चालू क्यों रखा गया? बीएमसी ने न तो कोई पूर्व नोटिस दी और न ही नागरिकों को इसके बारे में सूचित किया।"
उन्होंने आगे कहा कि बच्चों को स्कूल बंद होने के कारण दूर-दराज के स्कूलों में जाने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है, जो पूरी तरह से अनुचित है। वकील ने प्रशासन से मांग की है कि वह अपनी ऑडिट रिपोर्ट का सम्मान करे और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए स्कूल की मरम्मत करवाकर उसे जल्द से जल्द दोबारा शुरू करे।


