मुंबई : केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने पेश किए तीन कृषि विधेयक

मुंबई : केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने पेश किए तीन कृषि विधेयक


Rokthok Lekhani

मुंबई : राज्य की महा विकास आघाडी सरकार ने मंगलवार को विधानमंडल के मॉनसून अधिवेशन के दूसरे और आखिरी दिन विधानसभा में तीन कृषि विधायक पेश किए। विपक्ष की गैरमौजूदगी में सरकार चाहती तो इन विधेयकों को पारित करा सकती थी, लेकिन राज्य सरकार ने कहा कि वह इन विधायकों पर अगले 2 महीने के भीतर सभी संबंधित पक्षों (जिनमें किसान किसानों के संगठन और अन्य) की राय लेगी।

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इसके बाद विधानमंडल के शीतकालीन अधिवेशन में इन्हें पारित किया जाएगा। राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए गए तीनों विधायकों के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंत्रिमंडल की विशेष बैठक बुलाई, जिसमें तीनों विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी गई।

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सभागृह में कृषि मंत्री दादाजी भुसे ने किसान सशक्तिकरण व संरक्षण आश्वासित मूल्य व सेवा करार महाराष्ट्र संशोधन विधेयक, सहकारिता मंत्री बाला साहेब पाटील ने किसान उत्पादन व्यापार और व्यवहार (प्रोत्साहन और सुविधा) तथा खाद्य और नागरिक आपूर्ति और ग्राहक संरक्षण मंत्री छगन भुजबल जीवनावश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम 2021 पेश किया।

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विधेयक पेश किए जाने के बाद विधानसभा में हुई संक्षिप्त चर्चा में भाग लेते हुए राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात ने कहा कि केंद्र के कृषि कानून बिना चर्चा के पारित किए गए और उनके अनेक प्रावधान राज्य सरकारों के अधिकारों में हस्तक्षेप करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार है और हम केंद्र के कृषि कानूनों में संशोधन का सुझाव देना चाहते हैं, जो हमारे मुताबिक किसान विरोधी है।

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राज्य के कृषि विधेयक के मसौदे की मुख्य बातें
– किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी मिलेगी। इसके तहत कहा गया है कि व्यापारियों को किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य या उससे ज्यादा कीमत पर कृषि उपज खरीदनी होगी।
– किसानों को समय पर भुगतान की अनिवार्य शर्त के तहत कहा गया है कि किसानों और व्यापारियों के बीच कृषि उपज के भुगतान की जो समय सीमा तय की गई होगी, उसमें किसानों को भुगतान करना अनिवार्य होगा।
– राज्य सरकार ने अपने कृषि विधेयक में किसानों के साथ चीटिंग करने पर 3 साल की जेल और पांच लाख रुपये जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ लागू करने का प्रावधान किया है।
– किसानों के साथ व्यापार करने वालों को विशेष लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा, जबकि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों में ऐसी कोई शर्त नहीं है।
– राज्य सरकार के विधेयक में प्रस्ताव है कि कृषि उपयोग की जमाखोरी और जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा स्टॉक लिमिट खत्म किया जाना गलत है, जिस पर रोक लगनी चाहिए।


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