एंटीलिया विस्फोटक मामला: सचिन वाझे, प्रदीप शर्मा समेत 10 आरोपियों पर NIA कोर्ट ने तय किए आरोप, अब शुरू होगा हाई-प्रोफाइल ट्रायल
Antilia explosives case: NIA court frames charges against 10 accused including Sachin Vaze, Pradeep Sharma, high-profile trial to begin now
मुंबई की विशेष NIA अदालत ने एंटीलिया विस्फोटक और मनसुख हिरेन हत्या मामले में सचिन वाझे, प्रदीप शर्मा सहित 10 आरोपियों पर औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। सभी आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया है। अब इस बहुचर्चित मामले में नियमित ट्रायल शुरू होगा, जिसमें अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अंतिम फैसला सुनाएगी।
मुंबई: देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल वर्ष 2021 के एंटीलिया विस्फोटक और मनसुख हिरेन हत्या मामले में विशेष NIA अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाझे, पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा और अन्य आठ आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। अदालत में आरोप तय होने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले का नियमित ट्रायल शुरू होगा। सभी आरोपियों ने अदालत के समक्ष खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों से इनकार किया है। विशेष NIA न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं।
यह मामला 25 फरवरी 2021 को उस समय राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था, जब उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास 'एंटीलिया' के बाहर एक स्कॉर्पियो वाहन में जिलेटिन की छड़ें और धमकी भरा पत्र मिला था। इस घटना ने देश की सुरक्षा एजेंसियों और महाराष्ट्र पुलिस को सतर्क कर दिया था। शुरुआती जांच के बाद मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया। जांच के दौरान वाहन के मालिक ठाणे के व्यवसायी मनसुख हिरेन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसके बाद पूरे मामले ने हत्या और आपराधिक साजिश का गंभीर रूप ले लिया।
NIA की जांच के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से सुनियोजित साजिश के तहत विस्फोटकों से भरा वाहन एंटीलिया के बाहर खड़ा किया और बाद में मामले से जुड़े अहम गवाह तथा वाहन मालिक मनसुख हिरेन की हत्या कर सबूत मिटाने का प्रयास किया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम में कई लोगों की अलग-अलग भूमिकाएं थीं और सभी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए गए हैं। हालांकि, अदालत में आरोप तय होना किसी भी आरोपी के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। दोष या निर्दोषता का फैसला ट्रायल के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर किया जाएगा।
इस मामले में विशेष NIA अदालत द्वारा आरोप तय किया जाना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। अब अभियोजन पक्ष अपने गवाहों और सबूतों को अदालत के सामने पेश करेगा, जबकि बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। लंबे समय से चर्चा में रहे इस मामले की सुनवाई पर पूरे देश की नजर बनी हुई है, क्योंकि इसमें मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारियों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप भी शामिल हैं।


