मुंबई कोर्ट का फर्जी आदेश बनाकर दुबई की अदालत में पेश किया, यूएई के दो नागरिकों समेत छह पर केस

A fake Mumbai court order was produced and presented in a Dubai court, leading to a case against six people, including two UAE nationals.

मुंबई कोर्ट का फर्जी आदेश बनाकर दुबई की अदालत में पेश किया, यूएई के दो नागरिकों समेत छह पर केस

फर्जीवाड़ा करने वालों के हौंसले कितने बुलंद हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मामले में आरोपियों ने मुंबई कोर्ट का ही एक फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश कर दिया। आइए जानते हैं कि क्या है ये सनसनीखेज मामला और कैसे इसका भंडाफोड़ हुआ... 

मुंबई : फर्जीवाड़ा करने वालों के हौंसले कितने बुलंद हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मामले में आरोपियों ने मुंबई कोर्ट का ही एक फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश कर दिया। आइए जानते हैं कि क्या है ये सनसनीखेज मामला और कैसे इसका भंडाफोड़ हुआ... 
करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति के विवाद में बढ़त हासिल करने और एक भारतीय कारोबारी को अपराधी साबित करने के लिए मुंबई की अदालत का फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश पर मुंबई की कुर्ला पुलिस ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो नागरिकों समेत छह लोगों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और अदालत की मुहर व दस्तावेजों के दुरुपयोग के आरोप में मामला दर्ज किया है।

 

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क्या है पूरा मामला
पुलिस के मुताबिक, खंडाला निवासी वाहिदा हुसैन शत्ताफ की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके पति हुसैन मोहम्मद शत्ताफ की छवि खराब करने और संपत्ति विवाद में उनका दावा कमजोर करने के लिए आरोपियों ने मुंबई की अदालत का एक फर्जी आदेश तैयार किया। बाद में इसी दस्तावेज को दुबई की अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब शत्ताफ परिवार को दस्तावेज की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट के निर्देश पर दस्तावेज की जांच कराई गई। 

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जांच में ऐसे हुआ खुलासा
जांच के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अदालत के रिकॉर्ड की पड़ताल की और करीब एक दर्जन लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में पता चला कि जिस मुकदमे का उल्लेख फर्जी आदेश में किया गया था, वैसा कोई मामला कभी अदालत में चला ही नहीं था। दस्तावेज को असली दिखाने के लिए अदालत के डिजिटल हस्ताक्षर, सरकारी वकील और नोटरी की फर्जी मुहर तथा नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी आदेश में हुसैन मोहम्मद शत्ताफ को 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी, पासपोर्ट जालसाजी और हवाला कारोबार में दोषी बताया गया था। 

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इतना ही नहीं, उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने का भी झूठा दावा किया गया। जबकि वास्तविकता यह थी कि उस समय अदालत में केवल उनके जब्त दोपहिया वाहन को छुड़ाने की अर्जी पर सुनवाई हुई थी। कुर्ला पुलिस ने इस मामले में हुमैद मोहम्मद शत्ताफ और हलीमा सुल्तान अल ओवैस, (दोनों यूएई निवासी) के अलावा मधुकर रविराज विल्सन, केन रिचर्ड विल्सन, रजी अहमद और नोटरी शिवाजी एन. ढांगे को आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल करने के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

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