मद्रास उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: 'धोखाधड़ी या ब्लैकमेल से बना शारीरिक संबंध सहमति नहीं है'

Madras High Court's big decision: 'Physical relations based on fraud or blackmail are not consent'

मद्रास उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: 'धोखाधड़ी या ब्लैकमेल से बना शारीरिक संबंध सहमति नहीं है'

  • न्यायिक टिप्पणी: धोखाधड़ी, ब्लैकमेल या झूठे वादों के आधार पर ली गई सहमति अवैध है।
  • कानूनी आधार: सहमति 'स्वतंत्र इच्छा' (free will) से होनी चाहिए, किसी दबाव या धोखे से नहीं।
  • महत्व: यह फैसला यौन अपराधों के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक मिसाल बनेगा।
  • अदालत का निर्देश: अदालतों को सहमति की परिस्थितियों की गहराई से जांच करने का आदेश दिया गया है।

चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई शारीरिक संबंध किसी महिला को धोखा देकर या उसे ब्लैकमेल करके बनाए गए हैं, तो उसे कानून की नजर में 'सहमति' (consent) नहीं माना जा सकता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया है कि सहमति तभी मान्य होती है जब वह बिना किसी डर, दबाव या गलत बयानी के दी गई हो।

फैसले के मुख्य बिंदु:

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  • सहमति की परिभाषा: न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि सहमति केवल 'हां' कहना नहीं है, बल्कि वह स्वतंत्र इच्छा (free will) होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति ने शादी का झूठा वादा किया हो या ब्लैकमेल के जरिए संबंध बनाने पर मजबूर किया हो, तो ऐसी 'सहमति' का कोई कानूनी आधार नहीं है।
  • धोखाधड़ी का पहलू: अदालत ने कहा कि जब शारीरिक संबंध की शुरुआत ही धोखाधड़ी या गलत जानकारी पर आधारित हो, तो पीड़ित महिला की सहमति को 'स्वैच्छिक' नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में आरोपी का यह तर्क कि 'सहमति से संबंध थे', मान्य नहीं होगा।
  • ब्लैकमेल और दबाव: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ब्लैकमेल करना, डर दिखाना या किसी व्यक्ति की मजबूरी का फायदा उठाना 'सहमति' की भावना के पूर्णतः विपरीत है।

कानूनी महत्व:

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यह फैसला यौन अपराधों से जुड़े मामलों में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अक्सर बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया जाता है कि संबंध सहमति से थे, लेकिन इस आदेश के बाद अब यह स्पष्ट है कि यदि सहमति प्राप्त करने का तरीका ही अनैतिक या गैर-कानूनी (धोखा या डर) है, तो इसे कानून के तहत अपराध माना जाएगा।

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​न्यायालय ने निचली अदालतों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों की सुनवाई करते समय 'सहमति' के पीछे की परिस्थितियों और आरोपी द्वारा अपनाए गए तरीकों की बारीकी से जांच करें।

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